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शेयर बाजार में मचा हड़कंप: सेंसेक्स 900 अंक टूटा, एक दिन में डूबे इन्वेस्टर्स के 11 लाख करोड़ रुपए

भारतीय शेयर बाजार के लिए आज का दिन ‘ब्लैक ट्यूसडे’ साबित हुआ। वैश्विक तनाव और घरेलू आर्थिक चिंताओं के बीच बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी ताश के पत्तों की तरह ढह गए। इस गिरावट ने निवेशकों की झोली से चंद घंटों में 11 लाख करोड़ रुपए साफ कर दिए।

बाजार का हाल


मंगलवार को कारोबार की शुरुआत ही कमजोरी के साथ हुई थी, लेकिन दोपहर होते-होते बिकवाली का दबाव इतना बढ़ा कि सेंसेक्स 75,000 के साइकोलॉजी स्तर के नीचे फिसल गया। वहीं, निफ्टी ने भी 23,600 का अहम सपोर्ट लेवल तोड़ दिया। बाजार बंद होने तक चौतरफा बिकवाली देखी गई, जिसमें स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों को सबसे ज्यादा चोट पहुंची।

गिरावट के 4 मेन ट्रिगर


बाजार एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस महा-गिरावट के पीछे कुछ मेन रीज़न रहे:

मिडल ईस्ट में युद्ध की आहट: अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता विफल होने की खबरों ने वैश्विक बाजारों में डर का माहौल पैदा कर दिया है। निवेशकों को डर है कि यदि तनाव बढ़ा, तो सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित हो सकती है।

कच्चे तेल की ‘आग’: वैश्विक तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल $105 प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। भारत के लिए यह एक बड़ा झटका है क्योंकि इससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी और महंगाई बढ़ने का सीधा खतरा है।

रुपये की गिरावट: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया आज अपने सबसे निचले स्तर 95.63 पर जा गिरा। रुपये की इस कमजोरी ने विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) को बाजार से पैसा निकालने पर मजबूर कर दिया।

पीएम मोदी की ‘बचत’ की अपील: प्रधानमंत्री द्वारा ईंधन बचाने और सोने की खरीद कम करने की अपील के बाद कंज्यूमर और लग्जरी सेक्टर के शेयरों में 5% से 8% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई।

इन्वेस्टर्स को ह्यूज लॉस


BSE पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Cap) कल के 450 लाख करोड़ रुपए से घटकर लगभग 439 लाख करोड़ रुपए पर आ गया। यानी महज एक दिन में निवेशकों की संपत्ति में 11 लाख करोड़ की डेंट लग गई।

एक्सपर्ट्स की राय


मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक जियोपॉलिटिकल हालात नार्मल नहीं होते, बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा। इन्वेस्टर्स को सलाह दी जा रही है कि वो इस अस्थिरता के बीच जल्दबाजी में खरीदारी न करें और ‘वेट एंड वॉच’ की नीति अपनाएं।
मार्केट एक्सपर्ट का ये भी कहना है की बाजार इस समय अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। कच्चे तेल की कीमतें और डॉलर का मजबूत होना भारतीय इकोनॉमी के लिए दोहरी चुनौती है।

news desk

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