पर्यावरण और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो ने सुप्रीम कोर्ट में एक शपथपत्र दायर करके बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा है कि दिल्ली में उनके घर से निकलने के बाद पुलिस और इंटेलिजेंस ब्यूरो के लोग लगातार उनका पीछा कर रहे हैं और उन पर नजर रख रहे हैं.
उन्होंने दावा किया है कि दिल्ली में 30 सितंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के बाद से ही, जब भी वह घर से बाहर निकलती हैं, एक कार और कुछ बाइक सवार व्यक्ति उनका पीछा करते हैं. यह निगरानी लगातार बनी हुई है. उन्होंने सीधे तौर पर राजस्थान पुलिस और इंटेलिजेंस ब्यूरो पर नजर रखने का आरोप लगाया है.
उनका तर्क है कि यह गतिविधि भारतीय संविधान के दो महत्वपूर्ण मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है. हर नागरिक को भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा देश में स्वतंत्र रूप से घूमने का अधिकार देता है. हर नागरिक को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देता है. उनका कहना है कि लगातार निगरानी के कारण उनकी सामान्य जिंदगी और आज़ादी प्रभावित हुई है.
पति से संपर्क और कानूनी लड़ाई में बाधा
यह मुद्दा सिर्फ गीतांजलि की अपनी स्वतंत्रता तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके पति की कानूनी लड़ाई से भी जुड़ा है. गीतांजलि ने ज़ोर देकर कहा है कि एक पत्नी होने के नाते, उन्हें अपने पति सोनम वांगचुक से जोधपुर जेल में बिना किसी रोक-टोक के और गोपनीयता के साथ मिलने का पूरा अधिकार है, लेकिन निगरानी के कारण यह भी संभव नहीं हो पा रहा है.
गीतांजलि पहले ही संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर चुकी हैं, जिसमें उन्होंने अपने पति पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) लगाए जाने को चुनौती दी है. उनका आरोप है कि वांगचुक को हिरासत में लेने का आदेश भी उन्हें समय पर नहीं दिया गया, जो नियमों का उल्लंघन करना है.
बता दे की सोनम वांगचुक पिछले काफी समय से लद्दाख में पर्यावरण संरक्षण, अवैध खनन और क्षेत्र को संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) के तहत विशेष दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे. उसके बाद प्रशासन ने उन्हें 24 सितंबर को हुई हिंसक झड़पों को भड़काने के आरोप में हिरासत में लिया. उनका तर्क है कि वांगचुक के भड़काऊ भाषणों के कारण प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया.
गीतांजलि और समर्थक कहते हैं कि वांगचुक हमेशा शांति की बात करते हैं और उन्हें फंसाया जा रहा है. उनकी गिरफ्तारी को लद्दाख में चल रहे पर्यावरण आंदोलन को दबाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.
आगे क्या होगा?
यह मामला अब सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि न्यायिक समीक्षा के दायरे में आ गया है. चूंकि गीतांजलि ने सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, अदालत जल्द ही निगरानी के आरोपों पर सुनवाई करेगी. आरोपों के जवाब में सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि क्या वास्तव में निगरानी की जा रही है, और यदि हाँ, तो उसके पीछे क्या कानूनी आधार है.