नई दिल्ली: रात में बार-बार पेशाब के लिए उठने की समस्या को मेडिकल भाषा में नोक्टूरिया कहा जाता है। इसकी वजह कई बार गलत खानपान और जीवनशैली हो सकती है, लेकिन कुछ मामलों में यह किसी स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकती है। रात में बार-बार नींद टूटने से लंबे समय तक थकान और दिनभर सुस्ती जैसी परेशानी हो सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, पर्याप्त पानी पीने और खानपान में जरूरी बदलाव से कुछ लोगों में इस समस्या को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
भारतीय योग गुरु, लेखक, शोधकर्ता और टीवी हस्ती डॉ. हंसा योगेंद्र के मुताबिक, रात में ज्यादा पेशाब आने की समस्या के करीब 90 प्रतिशत मामले जीवनशैली और खानपान में बदलाव से जुड़े हो सकते हैं। वहीं, आयुर्वेदिक और यूनानी चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. सलीम जैदी के अनुसार, कुछ फलों में मौजूद पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट मूत्राशय की सेहत के लिए उपयोगी हो सकते हैं।
नोक्टूरिया के पीछे कई कारण हो सकते हैं। कुछ लोगों के शरीर में रात के समय जरूरत से ज्यादा पेशाब बनता है, जिसे नॉक्टर्नल पॉलीयूरिया कहा जाता है। वहीं, ओवरएक्टिव ब्लैडर की स्थिति में मूत्राशय में कम मात्रा में पेशाब होने पर भी तेज पेशाब लग सकती है।
पुरुषों में प्रोस्टेट का बढ़ना यानी बेनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया भी इसका एक सामान्य कारण हो सकता है। इसके अलावा डायबिटीज, शाम के समय ज्यादा तरल पदार्थ पीना और दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी रात में बार-बार पेशाब आने की वजह बन सकती हैं।
केला कम अम्लीय फल है और इसमें फाइबर के साथ पोटैशियम भी पाया जाता है। इसे सुबह या दोपहर के भोजन के साथ सीमित मात्रा में लिया जा सकता है। हालांकि, किडनी की बीमारी से जूझ रहे लोगों को पोटैशियम की मात्रा को लेकर डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
शरीर में पोटैशियम और मैग्नीशियम का स्तर कम होने पर मांसपेशियों और मूत्राशय के नियंत्रण पर असर पड़ सकता है।
पकी हुई नाशपाती फाइबर का अच्छा स्रोत है और आमतौर पर मूत्राशय के लिए कम उत्तेजक फल मानी जाती है। इसे सुबह के बीच के समय या दोपहर के भोजन के आसपास लिया जा सकता है। डायबिटीज वाले लोगों को इसकी मात्रा का ध्यान रखना चाहिए।
इसके विपरीत संतरा, अंगूर और नींबू जैसे खट्टे फलों में मौजूद अम्ल कुछ लोगों में मूत्राशय में जलन बढ़ा सकते हैं। इससे बार-बार पेशाब लगने की समस्या महसूस हो सकती है। हालांकि, इसका असर हर व्यक्ति में एक जैसा नहीं होता।
ब्लूबेरी में पॉलीफेनॉल और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। इसे दिन के समय सीमित मात्रा में लिया जा सकता है। हालांकि, ब्लूबेरी को नोक्टूरिया का इलाज नहीं माना जाना चाहिए। इसे संतुलित आहार के एक हिस्से के तौर पर लेना बेहतर है।
पपीता फाइबर से भरपूर फल है और इसमें पाचन से जुड़े एंजाइम भी पाए जाते हैं। इसे दोपहर के समय या दोपहर के भोजन के आसपास लिया जा सकता है। सामान्य मात्रा में पपीता अधिकांश लोगों के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है।
तरबूज में पानी की मात्रा काफी ज्यादा होती है। ऐसे में अगर रात में बार-बार पेशाब आने की शिकायत है तो शाम या सोने से ठीक पहले तरबूज खाना उचित नहीं माना जाता। इसे दिन में सीमित मात्रा में लिया जा सकता है।
रात में तरबूज खाने से शरीर में कुल तरल पदार्थ की मात्रा बढ़ सकती है और कुछ लोगों में रात के समय पेशाब की समस्या बढ़ सकती है।
सेब में फाइबर पाया जाता है और इसे आमतौर पर आसानी से पचने वाला फल माना जाता है। इसे दिन के समय खाया जा सकता है। डायबिटीज या ब्लड शुगर की समस्या वाले लोगों को इसकी मात्रा का ध्यान रखना चाहिए।
सेब को दही, नट्स या प्रोटीन और वसा वाले खाद्य पदार्थों के साथ लेने से भोजन के बाद ब्लड ग्लूकोज पर पड़ने वाले प्रभाव को संतुलित करने में मदद मिल सकती है।
अगर मूत्राशय संवेदनशील है तो संतरा, ग्रेपफ्रूट और नींबू जैसे खट्टे फल कुछ लोगों में जलन बढ़ा सकते हैं। हालांकि, हर व्यक्ति में इनका असर एक जैसा नहीं होता।
क्रैनबेरी जूस को अक्सर यूरिनरी ट्रैक्ट की सेहत से जोड़ा जाता है, लेकिन यह अम्लीय होता है और कुछ लोगों में मूत्राशय से जुड़ी परेशानी बढ़ा सकता है। इसी तरह शाम के समय बहुत अधिक पानी वाले फल, खासकर तरबूज, लेने से बचना बेहतर हो सकता है।
फलों का चुनाव मूत्राशय की संवेदनशीलता, पूरे दिन लिए जाने वाले तरल पदार्थ और ब्लड शुगर को ध्यान में रखकर करना चाहिए। कुछ लोगों में खट्टे और अम्लीय खाद्य पदार्थ मूत्राशय में जलन और अचानक पेशाब की इच्छा बढ़ा सकते हैं।
अगर रात में बार-बार पेशाब आता है तो फलों को सुबह, सुबह के बीच के समय या दोपहर में लेना बेहतर हो सकता है। खासकर अधिक पानी वाले फलों को सोने के समय खाने से बचना चाहिए। रात में जरूरत से ज्यादा तरल पदार्थ लेने से भी बचें।
फल सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं, लेकिन जरूरत से ज्यादा खाना जरूरी नहीं है। सामान्य तौर पर एक बार में एक छोटा फल या कटे हुए फल की सीमित मात्रा पर्याप्त हो सकती है। डायबिटीज वाले लोगों को अपने कुल कार्बोहाइड्रेट और ब्लड शुगर के हिसाब से फलों की मात्रा तय करनी चाहिए।
अगर लगातार रात में दो या उससे ज्यादा बार पेशाब के लिए उठना पड़ता है, समस्या हाल में शुरू हुई है या इसके साथ बहुत ज्यादा प्यास, पेशाब में जलन या दर्द, पेशाब में खून, पैरों में सूजन, पेशाब की धार कमजोर होना या अचानक पेशाब रुक जाना जैसे लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
नोक्टूरिया के पीछे डायबिटीज, प्रोस्टेट की समस्या, ओवरएक्टिव ब्लैडर या अन्य चिकित्सकीय कारण हो सकते हैं। इसलिए केवल डाइट में बदलाव को इसका इलाज मानना सही नहीं होगा।
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