नई दिल्ली। चुनाव आयोग में चल रहे Special Intensive Revision यानी SIR से जुड़े विवाद और दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों की खबरों के बीच शनिवार को आयोग की अहम बैठक हुई। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी भी बैठक में शामिल हुए। बैठक के बाद आयोग ने कई अहम फैसलों की जानकारी देते हुए कहा कि SIR से जुड़े उसके फैसले तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
आयोग ने खास तौर पर Form-6 को लेकर उठे सवालों पर भी स्थिति स्पष्ट की। ECI के मुताबिक, SIR से जुड़ा Form-6 का डिक्लेरेशन व्यवस्था का हिस्सा है और इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही का भी हवाला दिया गया है। यह मुद्दा ऐसे समय में उठा है जब हाल में दो चुनाव आयुक्तों की ओर से Form-6 में SIR से जुड़ी घोषणा पर आपत्ति दर्ज किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी।
बैठक में तय किया गया कि SIR के दौरान नोटिस पाने वाले मतदाताओं के मामले में हर व्यक्ति को सुनवाई के लिए बुलाना जरूरी नहीं होगा। ऐसे मामलों में Booth Level Officer यानी BLO संबंधित मतदाता के घर जाकर जरूरी दस्तावेज ले सकते हैं और उन्हें ECINET पर अपलोड करेंगे। इसके बाद Electoral Registration Officer यानी ERO उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय करेगा।
आयोग ने यह भी कहा कि जरूरत के मुताबिक District Election Officers यानी DEO रैन बसेरों, मजदूरों, गरीबों और बेघर लोगों के लिए हेल्प डेस्क की व्यवस्था करेंगे, ताकि पात्र मतदाता SIR की प्रक्रिया से बाहर न रह जाएं।
Form-6 नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। हाल में इसमें SIR से जुड़ा एक अतिरिक्त डिक्लेरेशन सामने आने के बाद विवाद हुआ था। इस व्यवस्था को लेकर चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की आपत्तियों की रिपोर्ट भी सामने आई थी।
अब आयोग ने अपनी बैठक में कहा कि Form-6 के साथ SIR से संबंधित घोषणा की व्यवस्था बनी रहेगी। आयोग के अनुसार, SIR पूरा होने के बाद भी जिन पात्र लोगों के नाम मतदाता सूची में छूट गए हैं, वे निरंतर अपडेटेशन की प्रक्रिया के तहत संबंधित ERO के पास आवेदन कर सकते हैं। इसमें नए और पहली बार मतदान करने वाले युवा भी शामिल हैं।
ECI ने कहा कि बिहार और पश्चिम बंगाल समेत 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। आयोग के मुताबिक, इस दौरान जिन पात्र मतदाताओं के नाम छूट गए हैं, वे नाम शामिल कराने के लिए संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के पास आवेदन कर सकते हैं।
आयोग ने मुख्य निर्वाचन अधिकारियों यानी CEOs को ऐसे मतदाताओं की मदद के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश भी दिए हैं।
बैठक में ECINET सिस्टम की समीक्षा का भी फैसला लिया गया। आयोग के मुताबिक, इसकी समीक्षा वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त और IIT तथा IIM के स्वतंत्र विशेषज्ञों वाली समिति करेगी।
ECINET को लेकर भी हाल के दिनों में सवाल उठे हैं। Indian Express की रिपोर्ट में चुनाव आयुक्तों की ओर से चुनावी सॉफ्टवेयर और प्रक्रियाओं से जुड़े कई मुद्दों पर आपत्ति दर्ज किए जाने की बात सामने आई थी।
आयोग ने SIR से जुड़े दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की समयसीमा में भी बदलाव किया है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में दावे-आपत्तियों की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर और महाराष्ट्र में 12 नवंबर कर दी गई है। संबंधित मामलों के निपटारे की समयसीमा भी आगे बढ़ाई गई है।
बैठक के बाद आयोग ने कैबिनेट सचिव को भेजी गई चिट्ठी को लेकर भी सफाई दी। ECI के मुताबिक, यह पत्र देशव्यापी SIR की नीति या किसी चुनावी नीति संबंधी फैसले से जुड़ा नहीं था, बल्कि एक प्रतिनियुक्त अधिकारी के कामकाज और प्रशासनिक व्यवस्था से संबंधित था।
आयोग ने यह भी कहा कि देशव्यापी SIR से जुड़े उसके फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब दो चुनाव आयुक्तों की ओर से अलग-अलग मुद्दों पर लिखित आपत्तियों को लेकर रिपोर्ट सामने आई है।
ECI ने कहा कि अब आयोग की बैठकों के लिए एजेंडा पहले से भेजा जाएगा और बैठक की कार्यवाही भी जारी की जाएगी। इसके अलावा अधिकारियों की APAR रिपोर्ट हर साल 31 दिसंबर तक पूरी करने की व्यवस्था पर जोर दिया गया है।
अधिकारियों की विदेश यात्राओं के लिए आयोग की अनुमति जरूरी होने और आयुक्तों की ओर से अधिकारियों को दिए गए निर्देशों के पालन को सुनिश्चित करने की बात भी बैठक में कही गई।
शनिवार की बैठक के बाद चुनाव आयोग ने एक तरफ SIR से जुड़े प्रशासनिक बदलावों की जानकारी दी, वहीं दूसरी तरफ उन रिपोर्टों के बीच अपनी स्थिति भी स्पष्ट की जिनमें आयोग के भीतर मतभेद और दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का जिक्र किया गया था।
Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, संधू और जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग की कुछ प्रक्रियाओं और फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। इसके जवाब में आयोग ने कहा है कि अलग-अलग राय निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा हैं और उसके फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
अब शनिवार की बैठक के बाद फोकस दो अहम मुद्दों पर रहेगा—SIR के दौरान छूटे पात्र मतदाताओं को सूची में वापस जोड़ने की प्रक्रिया कितनी आसान होती है और ECINET की स्वतंत्र समीक्षा में क्या सामने आता है।
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