भारतीय कमोडिटी मार्केट (MCX) में आज वो हुआ जो हिस्ट्री में पहले कभी नहीं देखा गया। चांदी की कीमतों में ऐसी ‘सुनामी’ आई कि सारे पुराने रिकॉर्ड्स कागज की तरह बह गए है। सोमवार को मार्केट खुलते ही चांदी 10,000 रुपए प्रति किलो से ज्यादा उछल गई, जिससे ट्रेडर्स और इन्वेस्टर्स के बीच खलबली मच गई है।
चांदी की ‘रॉकेट’ रफ़्तार, क्यों हो रही है ‘सिल्वर स्ट्राइक’?
चांदी की इस रिकॉर्ड-तोड़ बढ़त के पीछे कोई एक वजह नहीं, बल्कि ग्लोबल फैक्टर्स का एक ‘परफेक्ट स्टॉर्म’ है:
1- मार्केट में अफवाहें हैं कि चीन 2026 से चांदी के एक्सपोर्ट पर सख्त बैन लगाने वाला है। ग्लोबल सप्लाई का बड़ा हिस्सा चीन से आता है, इसलिए ट्रेडर्स के बीच ‘पैनिक बाइंग’ शुरू हो गई है।
2- चांदी अब सिर्फ गहनों तक सीमित नहीं है। सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) की डिमांड ने चांदी को ‘New Oil’ बना दिया है। सप्लाई कम है और मांग बेतहाशा, जिसका नतीजा कीमतों में दिख रहा है।
3- ग्लोबल मार्केट में डॉलर इंडेक्स कमजोर हो रहा है। जब डॉलर कमजोर होता है, तो स्मार्ट इन्वेस्टर्स सोने-चांदी में पैसा पार्क करना सेफ समझते हैं।
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये तो बस ट्रेलर है। :
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है: की चांदी अब एक प्रेशियस मेटल से ज्यादा एक ‘क्रिटिकल इंडस्ट्रियल कमोडिटी’ बन चुकी है। जिस तरह की सप्लाई किल्लत है, मुमकिन है कि हम जल्द ही 2.70 लाख रुपए का स्तर भी देख लें।