पटना. बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित हो चुके हैं और एनडीए ने प्रचंड बहुमत हासिल किया है. इसके साथ ही अगले कुछ दिनों में नीतीश कुमार एक बार फिर बिहार की सत्ता संभालने जा रहे हैं. परिणामों की पड़ताल करने पर साफ दिखता है कि इस स्तर की जीत की कल्पना चुनाव से पहले किसी ने नहीं की थी.
चुनाव अभियान के दौरान महागठबंधन को जनता से भारी समर्थन मिलता दिख रहा था. उनकी रैलियों में बड़ी भीड़ उमड़ रही थी, लेकिन यह समर्थन वोटों में तब्दील नहीं हुआ और नतीजे के रूप में महागठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा.
दूसरी ओर, हार को लेकर विपक्ष एक बार फिर हमलावर है और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है. इसी बीच आरजेडी की पहली महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक सोमवार को पटना में हुई, जिसमें तेजस्वी यादव को एक बार फिर विधायक दल का नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चुना गया.
बैठक में आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, सांसद मीसा भारती सहित कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी अहम रही.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, समीक्षा बैठक के बाद पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने एक विवादित बयान देकर राजनीतिक हलचल बढ़ा दी. उन्होंने दावा किया कि उन्हें चुनाव में आरजेडी के प्रदर्शन की ऐसी उम्मीद नहीं थी. उनका आरोप है कि “हर ईवीएम में करीब 25 हज़ार वोट पहले से कैद थे. इसके बावजूद हमारे 25 विधायक जीत गए, यह भी हमारे लिए सौभाग्य है.”
उनके इस ताज़ा बयान ने एक बार फिर बिहार की राजनीति का तापमान बढ़ा दिया है, क्योंकि यह सीधा चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है. जगदानंद सिंह ने मीडिया से बातचीत में आगे कहा कि यदि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में ही छेड़छाड़ होने लगे तो देश किस दिशा में जाएगा.उनका आरोप है कि परिस्थितियों को बदलने के लिए सत्ता पक्ष की ओर से ‘विशेष उपाय’ किए गए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या लोकतंत्र किसी तरह का व्यापार है, जिसमें लगातार धोखाधड़ी चलती रहे.
संविधान को बचाने की अपील करते हुए उन्होंने अपना दावा दोहराया कि ईवीएम में गड़बड़ी चुनाव परिणामों को प्रभावित करने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि बीजेपी और चुनाव आयोग इस आरोप का क्या जवाब देते हैं?