अयोध्या/लखनऊ। अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के इस्तीफे की खबरों ने देश के राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में भूचाल ला दिया है। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इस हाई-प्रोफाइल मामले में जितने मुंह, उतनी बातें सामने आ रही हैं।
एक तरफ जहां उत्तर प्रदेश सरकार के सूत्रों का दावा है कि इस्तीफा हो चुका है, वहीं मंदिर ट्रस्ट और वीएचपी (VHP) के बड़े नेता इस पूरी खबर को सिरे से खारिज कर रहे हैं। आखिर इस ‘इस्तीफा कांड’ के पीछे का सच क्या है और परदे के पीछे क्या खिचड़ी पक रही है? आइए समझते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम में भ्रम की स्थिति इतनी ज्यादा है कि क्रेडिबल सोर्स भी आपस में टकरा रहे हैं। दावों की लिस्ट कुछ इस प्रकार है:
ट्रस्ट अध्यक्ष और करीबियों का इनकार: मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष और चंपत राय के करीबी नेताओं का साफ कहना है कि ऐसा कुछ नहीं हुआ है। चंपत राय ने कोई इस्तीफा नहीं दिया है। वही एक न्यूज़ पेपर ने भी ट्रस्ट अध्यक्ष के हवाले से लिखा है कि इस्तीफे की बात बेबुनियाद है।
VHP और गोपाल राव की चुप्पी: विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अध्यक्ष आलोक कुमार ने बयान दिया है कि उनके पास ऐसी कोई आधिकारिक सूचना नहीं है। वहीं संगठन के दिग्गज नेता गोपाल राव ने भी इन खबरों को खारिज किया है।
UP सरकार के सोर्स बोले- ‘इस्तीफा डन’: उत्तर प्रदेश सरकार को कवर करने वाले पत्रकारों और आधिकारिक सूत्रों का दावा बिल्कुल विपरीत है। उनका कहना है कि चंपत राय का इस्तीफा लिया जा चुका है।
भले ही आधिकारिक तौर पर कोई कुछ भी बोलने से बच रहा हो, लेकिन मीडिया और संघ (RSS) के गलियारों से छनकर आ रही खबरें कुछ और ही इशारा कर रही हैं
एक अन्य अखबार की एक इनसाइड स्टोरी के मुताबिक, चंपत राय को हटाए जाने या उनके इस्तीफे की पूरी पटकथा हरिद्वार में लिखी गई थी, जहां पिछले दिनों संतों और संगठन के बड़े पदाधिकारियों की एक गुप्त बैठक हुई थी।
संघ के करीबी पत्रकारों की मानें तो पिछले कुछ विवादों और मंदिर प्रबंधन से जुड़े मुद्दों को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) बेहद नाराज चल रहा था और इसी नाराजगी का नतीजा है कि यह कड़ा फैसला लिया गया।
यही नहीं, यूपी सरकार के गलियारों से आ रही खबरें बताती हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पूरे मामले को सुलझाने और व्यवस्था सुधारने के लिए 15 दिन का समय मांगा था। वह समय सीमा पूरी होते ही यह बड़ा एक्शन देखने को मिला है।
फिलहाल स्थिति यह है कि सरकार और संघ से जुड़े सूत्र चंपत राय की विदाई तय मान रहे हैं, जबकि ट्रस्ट और वीएचपी डैमेज कंट्रोल में जुटे हैं ताकि मंदिर की छवि पर कोई आंच न आए। अब देखना यह है कि क्या आने वाले दिनों में चंपत राय खुद सामने आकर इस सस्पेंस से पर्दा उठाते हैं, या ट्रस्ट की अगली बैठक में इस पर कोई आधिकारिक मुहर लगती है।
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