बिहार चुनाव से पहले एनडीए में सीट शेयरिंग को लेकर उठापटक तेज होती जा रही है. सामान्य तौर पर एनडीए के सभी घटक दल सीट शेयरिंग के फार्मूले पर सहमत नजर आ रहे हैं लेकिन इस पूरे मामले में पेंच फंसा रहे हैं चिराग पासवान.
पूर्व केंद्रीय मंत्री और एलजेपी के संस्थापक रामविलास पासवान की पुण्यतिथि के मौके पर उनके बेटे चिराग पासवान एक ओर अपने पिता को याद करते दिखे, तो दूसरी ओर NDA में अपने सम्मान और हिस्सेदारी का संकेत भी दिया.
श्रद्धांजलि के बहाने दिया सियासी संकेत!
इस अवसर पर चिराग ने एक्स पर पोस्ट किया कि ‘पापा हमेशा कहा करते थे — जुर्म करो मत, जुर्म सहो मत. जीना है तो मरना सीखो, कदम-कदम पर लड़ना सीखो.’

इस पोस्ट के बाद सियासी गलियारों में चर्चा होने लगी कि चिराग बिहार चुनाव में अपने लिए ज्यादा सीटों की मांग को लेकर संकेत दे रहे हैं. क्योंकि हाल ही में सूत्रों के अनुसार एडीए में जो शीट शेयरिंग का फार्मूला बना था वो इस प्रकार से था. बीजेपी ने चिराग को 25-28 सीटों का प्रस्ताव दिया है, लेकिन चिराग कम से कम 35-40 सीटों की मांग पर अड़े हैं. उनका तर्क है कि पार्टी की सामाजिक पकड़ बढ़ी है और उन्हें “बराबरी की नजर से” देखा जाना चाहिए. वे खासतौर पर दो सीटों ब्रह्मपुर और गोविंदगंज पर अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को उतारना चाहते हैं. गोविंदगंज सीट एलजेपी की पारंपरिक सीट रही है. यहां राजन तिवारी के भाई राजू तिवारी 2015 का चुनाव जीत चुके हैं. और चिराग के बेहद खास माने जाते हैं.
NDA के लिए अग्निपरीक्षा?
बीजेपी और जेडीयू इस समय एक ऐसी स्थिति में हैं, जहां उन्हें हर साथी को साथ रखना भी है और सीटों का संतुलन भी साधना है. अगर चिराग को मनाया नहीं गया, तो उनके जन समर्थन और युवा वोटर्स का बड़ा हिस्सा NDA से छिटक सकता है. वहीं, सियासी गलियारों में यह भी चर्चा है कि चिराग प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी से भी गुप्त वार्ता कर चुके हैं. यानि उनके पास बैकअप योजना भी तैयार है. और अगर ऐसा हुआ तो बिहार में महागठबंधन और एनडीए के बाद तीसरा गठबंधन भी मैदान में अपना सियासी दांवपेंच दिखा सकता है.