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RDX या C-4? दिल्ली ब्लास्ट ने खड़ा किया बड़ा सवाल! कितना घातक है ये ‘मिलिट्री-ग्रेड’ बारूद?

हाल ही में दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार ब्लास्ट की गहन जाँच में सुरक्षा एजेंसियों को एक गंभीर खतरा मिला है. शुरुआती जाँच और घटनास्थल पर हुए नुक्सान के अनुमान से ये संदेह जताया जा रहा है कि ब्लास्ट में मिलिट्री-ग्रेड विस्फोटक (Military-Grade Explosives) का इस्तेमाल किया गया होगा, जिसमें ख़ास तौर पर PETN और RDX जैसे पावरफुल केमिकल्स शामिल होते है.

क्या होते हैं ये मिलिट्री-ग्रेड विस्फोटक?
ये विस्फोटक आम पटाखों से कई गुना ज्यादा पोवरफुल होते हैं और ख़ासतौर पर सेना के इस्तेमाल के लिए बनाए जाते हैं.इन्हें ‘हाई एक्सप्लोसिव’ भी कहते हैं. इनकी फटने की स्पीड 8 से 9 किलोमीटर-पर-सेकंड तक होती है, जिससे ये बड़े शॉक वेव पैदा करते हैं और इमारतों को भी गिराने की क्षमता रखते हैं.

मेजर टाइप्स कोन-कौन से है इसके?

RDX (हेक्सोजन) ये सबसे शक्तिशाली एक्सप्लोसिव्स में से एक है., HMX: RDX से भी ज़्यादा मज़बूत और एडवांस्ड मिसाइलों में इस्तेमाल होता है और C-4: यह प्लास्टिक एक्सप्लोसिव होता है, जिसे आसानी से कहीं भी छिपाया या फिट किया जा सकता है.

जाँच के केंद्र में PETN

जाँच में PETN (पेंटाएरिथ्रिटोल टेट्रानाइट्रेट) पर विशेष रूप से ध्यान दिया जा रहा है. फोरेंसिक टीम घटनास्थल से जुटाए गए 42 साक्ष्यों की जाँच कर रही है, ताकि एक्सप्लोसिव के टाइप का कन्फर्मेशन हो सके. PETN सबसे खतरनाक एक्सप्लोसिव्स में से एक है और इसे प्लास्टिक विस्फोटक Semtex का एक मुख्य हिस्सा माना जाता है.

जाँच करने वाली टीम का मानना है कि बम एक्सप्लोसिव’ को फोड़ने के लिए एक सही तरीक़े का सर्किट और छोटी बैटरी इस्तेमाल की गई थी. पर धमाके में कौन सा विस्फोटक था, इसकी पक्की जानकारी फ़ोरेंसिक जाँच की रिपोर्ट आने के बाद ही मिलेगी.
विशेषज्ञों के अनुसार, PETN की बहुत कम मात्रा लगभग 100 ग्राम भी किसी कार को पूरी तरह नष्ट करने के लिए काफ़ी है. विशेषज्ञों का कहना है कि इन ‘साइलेंट किलर’ विस्फोटकों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय निगरानी और एक्स-रे जैसी बेहतर डिटेक्शन टेक्नोलॉजी की सख़्त ज़रूरत है, क्योंकि ये आतंकी घटनाओं में एक बड़ा खतरा बन चुके हैं.

Chaturvedi Shruti V.

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