दिल्ली यूनिवर्सिटी ने सांसद राहुल गांधी के हालिया बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि विश्वविद्यालय की प्रवेश और भर्ती प्रक्रिया को लेकर कही गई बातें तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया कि छात्रों के दाखिले और शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर जो दावे किए गए हैं, वे मौजूदा व्यवस्था से मेल नहीं खाते और ऐसे मामलों में टिप्पणी करने से पहले पूरी जानकारी लेना जरूरी है।
विश्वविद्यालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि दिल्ली यूनिवर्सिटी में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर प्रवेश मुख्य रूप से Common University Entrance Test यानी (CUET) के अंकों के आधार पर किया जाता है। अधिकतर पाठ्यक्रमों में सामान्य प्रवेश प्रक्रिया के तहत इंटरव्यू अनिवार्य नहीं है। ऐसे में यह कहना सही नहीं है कि छात्रों को इंटरव्यू के आधार पर प्रवेश से बाहर किया जाता है। विश्वविद्यालय ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह निर्धारित नियमों के तहत संचालित होती है और इसमें पारदर्शिता बनाए रखी जाती है।
भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी दी सफाई
विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने बयान में शिक्षकों और अन्य पदों पर नियुक्तियों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। दिल्ली यूनिवर्सिटी के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न विभागों और कॉलेजों में हजारों शिक्षकों की नियुक्तियां की गई हैं। इन भर्तियों में सभी आरक्षित और अनारक्षित वर्गों को नियमानुसार अवसर दिया गया है। विश्वविद्यालय का कहना है कि नियुक्ति प्रक्रिया निर्धारित मानकों, चयन समितियों और नियामकीय दिशा-निर्देशों के अनुसार पूरी की जाती है।प्रशासन ने यह भी कहा कि बिना पूरी जानकारी के दिए गए बयान विश्वविद्यालय को प्रभावित कर सकते हैं। इससे छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के बीच अनावश्यक भ्रम पैदा होने की आशंका रहती है। विश्वविद्यालय ने इस बात पर जोर दिया कि किसी बड़े शैक्षणिक संस्थान के बारे में टिप्पणी करते समय तथ्यों की जांच जरूरी है।
राहुल गांधी के बयान के बाद बढ़ी चर्चा
दरअसल, हाल ही में कांशीराम जयंती से जुड़े एक कार्यक्रम में राहुल गांधी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी का जिक्र करते हुए कहा था कि उन्होंने वहां जाकर देखा कि इंटरव्यू के जरिए छात्रों को बाहर किया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जाति के आधार पर छात्रों को इंटरव्यू में असफल किया जाता है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर Rashtriya Swayamsevak Sangh और उससे जुड़े संगठनों की सूची देखी जाए तो वहां ओबीसी और एससी वर्ग के लोगों की भागीदारी बहुत कम दिखाई देती है।
राहुल गांधी के इस बयान के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए अपनी प्रवेश और भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बताया और कहा कि विश्वविद्यालय संविधान और निर्धारित नियमों के अनुसार काम करता है।