सीटों पर पेंच!
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महागठबंधन की अंदरूनी खींचतान ने चुनावी रणनीति को उलझा दिया है. सीट बंटवारे को लेकर आपसी सहमति न बन पाने के चलते गठबंधन के सहयोगी दल के उम्मीदवार कम से कम 10 विधानसभा सीटों पर एक-दूसरे के खिलाफ चुनावी मैदान में उतर गए हैं. चुनावों में महागठबंधन के लिए ये 10 फ्रेंडली फाइट कितना असर डाल सकती है इसे इस बात से समझा जा सकता है कि 2020 के चुनाव में महागठबंधन महज 12 हजार वोटों से सरकार बनाने से चूक गई थी.
किन-किन सीटों पर बना टकराव?
वैशाली, कहालगांव , राजापाकर, बछवाड़ा, बेलदौर समेत 5 सीटों पर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस के उम्मीदवारों के बीच सीधा मुकाबला है. 4 सीटों पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) और कांग्रेस आमने-सामने हैं और 1 सीट पर विकासशील इंसान पार्टी (VIP) और RJD के बीच भी सीधी टक्कर है. इन सभी सीटों पर दोनों पक्षों ने दावा किया, लेकिन आपसी सहमति नहीं बनने के कारण सभी ने अपने-अपने प्रत्याशी मैदान में उतार दिए. हालांकि जैसी पहले चर्चा थी उसके अनुसार आरजेडी ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम के खिलाफ उम्मीदवार नहीं दिया है तो लालगंज से भी कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी को वापस ले लिया है.
RJD और कांग्रेस की चुप्पी
RJD और कांग्रेस, दोनों ने इस मुद्दे पर अब तक सार्वजनिक रूप से कोई बड़ा बयान नहीं दिया है. हालांकि पार्टी के अंदरूनी सूत्र मानते हैं कि सीटों को लेकर बातचीत अंतिम चरण में थी, लेकिन समय की कमी और स्थानीय स्तर पर दबाव के चलते उम्मीदवारों को रोकना संभव नहीं हो सका.
वहीं टिकट वितरण से नाराज जेएमएम ने भी अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया था लेकिन सूत्रों की माने तो राहुल गांधी ने हेमंत सोरेन से बात करके उन्हें मनाया. इसके अलावा वीआईपी प्रमुख मुकेश साहनी भी मनमाफिक सीटें नहीं मिलने से नाराज थे लेकिन उन्हें भी राहुल गांधी ने बात कर मना लिया. जिसके बाद मुकेश साहनी ने अपना प्रेस कॉन्फ्रेंस रद्द कर दिया.
इससे ये भी साफ है कि महागठबंधन के शीर्ष नेता किसी भी कीमत पर गठबंधन तोड़ना नहीं चाहते थे. लेकिन कुछ सीटों पर फ्रेंडली फाइट को रोक भी नहीं सके.
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