पूर्वांचल की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। बसपा के विधायक उमाशंकर सिंह और योगी सरकार के मंत्री व बलिया सदर से विधायक दयाशंकर सिंह आमने-सामने आ गए हैं। दोनों नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप इतने तीखे हो गए हैं कि मामला अब बलिया से निकलकर लखनऊ तक सियासी हलचल पैदा कर रहा है।
उमाशंकर सिंह का आरोप: निजी पैसे से विकास पर रोड़ा
अमेरिका से दूसरी बार ब्रेन ट्यूमर का ऑपरेशन कराकर लौटे उमाशंकर सिंह ने बिना नाम लिए मंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि गंभीर बीमारी से गुजरने के बाद उनकी कोशिश थी कि रसड़ा विधानसभा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) को आधुनिक और हाईटेक सुविधाओं से लैस किया जाए, ताकि आम लोगों को बेहतर इलाज मिल सके। इसके लिए जिला प्रशासन से अनुमति मांगी गई, पहले मना कर दिया गया, फिर डीएम के जरिए शासन से NOC मिली। लेकिन जैसे ही निजी खर्च से काम शुरू हुआ, अधिकारियों को जेल भेजने और मारपीट की धमकी देकर NOC निरस्त करा दी गई और विकास कार्य रुकवा दिया गया। उमाशंकर सिंह ने सवाल उठाया कि क्या विपक्ष के विधायक को विकास कराने का अधिकार नहीं है, वह भी तब जब खर्च सरकारी नहीं बल्कि निजी पैसे से किया जा रहा हो।
दयाशंकर सिंह का पलटवार: सड़कों के पैसे में लूट का आरोप
दूसरी ओर योगी सरकार में मंत्री दयाशंकर सिंह ने भी खुले मंच से पलटवार किया। बिना नाम लिए उन्होंने आरोप लगाया कि बलिया विधानसभा में 52 करोड़ रुपये से बनने वाली सड़क का पैसा लूट लिया गया और आज तक सड़क नहीं बनी। उन्होंने आवास विकास कॉलोनी की एक सड़क का जिक्र करते हुए कहा कि जिस सड़क को निजी खर्च से बनवाने का दावा किया जा रहा है, उसके लिए करीब 48 करोड़ रुपये पहले ही जारी हो चुके हैं। मंत्री ने दावा किया कि अगर उन्होंने अपने चुनावी वादे पूरे नहीं किए, तो वह आगे चुनाव नहीं लड़ेंगे और न ही जनता के बीच जाएंगे।
पूर्वांचल के इन दो कद्दावर ठाकुर नेताओं की यह जुबानी जंग साफ तौर पर विकास से ज्यादा सियासी वर्चस्व की लड़ाई नजर आ रही है। अब देखना होगा कि यह टकराव और तेज होता है या राजनीति के गलियारों में कोई समझौता निकलता है, लेकिन फिलहाल पूरे इलाके की नजर इसी सियासी भिड़ंत पर टिकी हुई है।