पटना। बिहार की राजनीति में दो दशकों से चला आ रहा ‘नीतीश युग’ अब एक नए अध्याय की ओर मुड़ गया है। 21 साल तक नीतीश कुमार के चेहरे के साथ सरकार चलाने वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) अब पहली बार अपना मुख्यमंत्री बनाने जा रही है। पटना की सड़कों पर हो रही भारी बैरिकेडिंग और सुरक्षा इंतजाम इस बात की तस्दीक कर रहे हैं कि 15 अप्रैल को बिहार को नया नेतृत्व मिलने जा रहा है।
पटना में युद्ध स्तर पर तैयारी, सुरक्षा घेरे में एयरपोर्ट रोड
सोमवार सुबह से ही पटना एयरपोर्ट से राजभवन और विधानसभा की ओर जाने वाली सड़कों को बांस-बल्लियों से घेरा जाने लगा है। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इस ऐतिहासिक शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए 14 अप्रैल की शाम पटना पहुंच सकते हैं। पीएम की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूरे रूट पर पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं।
शिवराज सिंह चौहान बने पर्यवेक्षक, कल होगी अहम बैठक
भाजपा ने बिहार में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। वह कल (14 अप्रैल) पटना पहुंचेंगे, जहां वह नवनिर्वाचित विधायकों और गठबंधन के साथियों के साथ बैठक करेंगे। इस बैठक के बाद ही औपचारिक रूप से मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लगेगी।
सीएम की रेस में दिग्गज: कौन बनेगा बिहार का नया मुखिया?
बिहार के अगले मुख्यमंत्री को लेकर कयासों का बाजार गर्म है। भाजपा की ओर से कई प्रभावशाली नाम चर्चा में हैं:
सम्राट चौधरी: प्रदेश अध्यक्ष और कद्दावर नेता, जिन्हें इस पद का सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है।
श्रेयसी सिंह: यदि भाजपा महिला कार्ड खेलती है, तो अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज और विधायक श्रेयसी सिंह का नाम सबसे आगे है।
विजय सिन्हा: वर्तमान डिप्टी सीएम और संगठन का लंबा अनुभव रखने वाले नेता भी रेस में शामिल हैं।
जनक राम: दलित चेहरे के रूप में जनक राम के नाम पर भी कयास लगाए जा रहे हैं।
‘सब कुछ योजना के अनुसार’-जेडीयू का रुख
गठबंधन में किसी भी तरह की अनबन की खबरों को खारिज करते हुए जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा, “सब कुछ सामान्य है और तय योजना के अनुसार चल रहा है। कहीं कोई समस्या नहीं है।” उनके इस बयान से साफ है कि एनडीए के भीतर नेतृत्व परिवर्तन पर आम सहमति बन चुकी है।