पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच चल रहे सीमा-तनाव के बीच पाकिस्तानी रक्षामंत्री का बड़ा बयान सामने आया है.पाकिस्तान के रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ ने अफगानिस्तान को साफ चेतावनी देते हुए कहा है कि ‘अगर इस्तांबुल में चल रही शांति वार्ता विफल होती है, तो इस्लामाबाद “खुली जंग” के लिए तैयार है.’
आसिफ का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच हाल के हफ्तों में सीमा पार झड़पों और हवाई हमलों ने स्थिति को बेहद गंभीर बना दिया है.
दोहा समझौते पर सवाल, इस्तांबुल में जारी दूसरी दौर की बातचीत
इस्तांबुल में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के प्रतिनिधिमंडल के बीच बातचीत का दूसरा चरण जारी है. इन वार्ताओं का उद्देश्य सीमा पार हमलों को रोकना, दोहा समझौते को मजबूत बनाना और आपसी विश्वास को बहाल करना है.
इसके अलावा, बैठक में अफगान शरणार्थियों की जबरन वापसी रोकने और शरणार्थी संकट को राजनीतिक विवाद न बनने देने पर भी चर्चा हो रही है.
‘हमने हमेशा अफगानिस्तान का साथ दिया’ — ख्वाजा आसिफ
पत्रकारों से बातचीत के दौरान पाकिस्तानी रक्षामंत्री आसिफ ने कहा कि ‘पाकिस्तान ने दशकों तक अफगानिस्तान की हर मुश्किल घड़ी में मदद की है.’
उन्होंने कहा, ‘हमने लाखों अफगान शरणार्थियों को शरण दी, उनके कठिन समय में साथ दिया, लेकिन अब हमारा सब्र जवाब दे रहा है. अफगान धरती से पाकिस्तान पर हमले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे.’
आसिफ ने यह भी बताया कि हाल के दिनों में सीमा पर कोई बड़ी झड़प नहीं हुई है, जो इस बात का संकेत है कि दोहा समझौते के तहत कुछ स्थिरता आई है. पर उन्होंने आगाह किया कि अगर कूटनीति विफल होती है, तो यह शांति अस्थायी साबित हो सकती है.
हालांकि तालिबान प्रशासन पाकिस्तान के इस आरोप को खारिज करता रहा है. पहले भी अफगानिस्तान की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि ‘अफगान भूमि का इस्तेमाल किसी भी देश पर हमले के लिए नहीं हो रहा है.’
निर्णायक मोड़ पर इस्तांबुल वार्ता
विश्लेषकों का कहना है कि इस्तांबुल वार्ता का परिणाम दोनों देशों के भविष्य के संबंध तय करेगा. अगर बातचीत सफल रहती है, तो सीमा पर संघर्षविराम कायम रह सकता है. लेकिन अगर यह प्रयास असफल हुआ, तो दक्षिण एशिया एक बार फिर नए संघर्ष की आग में झुलस सकता है.