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शांतिदूत बनने की होड़ या रणनीतिक खेल? ऑपरेशन सिंदूर पर ट्रम्प के बाद चीन ने किया मध्यस्थता का दावा

साल 2025 खत्म होने को है, लेकिन मई में हुए ऑपरेशन सिंदूर को लेकर सियासी और कूटनीतिक चर्चाएं अब भी जारी हैं। पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य टकराव को रुकवाने का श्रेय खुद को दिया और अब करीब सात महीने बाद चीन भी इसी कतार में आ खड़ा हुआ है। चीन ने दावा किया है कि उसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता की भूमिका निभाई थी, हालांकि भारत ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है।

ऑपरेशन सिंदूर और चीन की दोहरी भूमिका

मई 2025 में 7 से 10 मई तक चले चार दिनों के इस सैन्य संघर्ष में भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर भारी गोलीबारी और हवाई हमले हुए थे। इसी टकराव को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम दिया गया। दिलचस्प बात यह है कि इसी दौरान पाकिस्तान ने चीन से मिले जे-10सी फाइटर जेट्स और मिसाइलों का इस्तेमाल किया। पेंटागन की रिपोर्ट के मुताबिक 2025 तक चीन पाकिस्तान को 20 जे-10सी जेट्स डिलीवर कर चुका था, जो संख्या में भारत के राफेल जेट्स के बराबर हैं। ऐसे में हथियार देने वाला चीन अब खुद को शांतिदूत बता रहा है, जिस पर सवाल उठ रहे हैं।

ट्रंप के बाद चीन का दावा, भारत का साफ इनकार

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार यह दावा कर चुके हैं कि उन्होंने व्यापारिक दबाव बनाकर भारत-पाक तनाव को खत्म कराया। भारत ने तब भी और अब भी साफ कहा है कि किसी तीसरे पक्ष की कोई मध्यस्थता नहीं हुई। अब चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने कहा है कि बीजिंग ने 2025 में कई “हॉटस्पॉट मुद्दों” को सुलझाने में मदद की, जिसमें भारत-पाक संघर्ष भी शामिल है। लेकिन भारतीय विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद हालात पूरी तरह द्विपक्षीय बातचीत से संभाले गए, इसमें किसी बाहरी देश की भूमिका नहीं थी।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब चीन खुद भारत के साथ लद्दाख सीमा विवाद में उलझा हुआ है। जानकारों का मानना है कि चीन इस दावे के जरिए अपनी वैश्विक छवि एक जिम्मेदार शांतिदूत के रूप में पेश करना चाहता है, जबकि दूसरी तरफ वह पाकिस्तान को सैन्य मदद देकर क्षेत्रीय अस्थिरता भी बढ़ा रहा है। पाकिस्तान ने चीन के बयान का स्वागत किया है, लेकिन भारत ने दो टूक कहा है कि कश्मीर या किसी भी अन्य मुद्दे पर बाहरी दखल उसे मंजूर नहीं। ऑपरेशन सिंदूर अब एक बार फिर दक्षिण एशिया की जटिल भू-राजनीति और बड़ी ताकतों के आपसी श्रेय युद्ध को उजागर कर रहा है।

news desk

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