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तेल संकट गहराया: क्या दुनिया ‘एनर्जी लॉकडाउन’ की ओर बढ़ रही है?

नई दिल्ली। मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो गई है, जिसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। दुनिया के कुल तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है, और अब कच्चे तेल की कीमत $112 प्रति बैरल तक पहुंच गई है।

तेल महंगा, हर चीज महंगी

तेल की कीमत बढ़ने से ट्रांसपोर्ट का खर्च तेजी से बढ़ा है। इसका सीधा असर रोजमर्रा की चीजों पर पड़ रहा है—खाद्य पदार्थ से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक सब कुछ महंगा हो रहा है।
अमेरिका में पेट्रोल की कीमत $5 प्रति गैलन तक पहुंच चुकी है, जिससे वहां भी महंगाई का दबाव बढ़ गया है।

खाद्य सुरक्षा पर खतरा

सिर्फ तेल ही नहीं, बल्कि खाद (फर्टिलाइज़र) की सप्लाई भी प्रभावित हो रही है, क्योंकि इसका बड़ा हिस्सा भी इसी समुद्री मार्ग से आता है।
इससे खेती की लागत बढ़ेगी और आने वाले समय में खाद्य पदार्थों की कीमतों में और उछाल देखने को मिल सकता है।

उड़ानें कम, यात्रा महंगी

दुनिया की बड़ी एयरलाइंस जैसे United Airlines ने अपनी उड़ानों में कटौती शुरू कर दी है।
इस हफ्ते ही 5% फ्लाइट्स कम की गई हैं, और अन्य एयरलाइंस भी इसी राह पर हैं।
सरकारें लोगों से गैर-जरूरी यात्रा टालने की अपील कर रही हैं—कुछ वैसा ही माहौल जैसा कोविड के दौरान देखा गया था।

कई देशों में फ्यूल राशनिंग

स्थिति को देखते हुए कई देशों ने पहले ही फ्यूल राशनिंग लागू कर दी है:

  • Japan – एनर्जी वाउचर और सीमित ईंधन वितरण
  • South Korea – नियंत्रित सप्लाई
  • Bangladesh, Philippines, Sri Lanka – पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें
  • Australia – गैर-जरूरी यात्रा कम करने की सलाह

भारत की बात करें तो देश अपनी जरूरत का करीब 80% तेल आयात करता है, जिसमें बड़ा हिस्सा हॉर्मुज़ से आता है। ऐसे में यहां भी असर पड़ना तय माना जा रहा है।

सरकारों के संभावित कदम

अंतरराष्ट्रीय एजेंसी International Energy Agency ने पहले ही एक इमरजेंसी प्लान सुझाया है, जो कोविड के दौरान कारगर साबित हुआ था। इसमें शामिल हैं:

  • गाड़ियों के लिए ऑड-ईवन या लाइसेंस प्लेट आधारित नियम
  • हाईवे पर स्पीड लिमिट कम करना
  • वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा
  • हवाई यात्रा सीमित करना
  • गैस की जगह इलेक्ट्रिक उपकरणों का इस्तेमाल

आगे क्या? अगर हालात नहीं सुधरे तो तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं, जिससे

  • ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स महंगे होंगे
  • उड़ानें और कम होंगी
  • खेती की लागत बढ़ेगी
  • आम लोगों की जिंदगी पर सीधा असर पड़ेगा

विशेषज्ञ मानते हैं कि सरकारें इसे “एनर्जी सिक्योरिटी” के नाम पर लागू करेंगी, लेकिन आम लोगों के लिए इसका असर किसी सॉफ्ट लॉकडाउन से कम नहीं होगा।

news desk

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