नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ा दी गई है। दिल्ली की स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) अदालत ने सोमवार, 19 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस की मांग पर यह आदेश दिया। दोनों की पांच दिन की न्यायिक हिरासत सोमवार को खत्म हो रही थी। अदालत के फैसले के बाद दोनों को वापस तिहाड़ जेल भेज दिया गया।
दिल्ली पुलिस ने दोनों प्रवक्ताओं को 13 अक्टूबर को हिरासत में लिया था। इसके बाद 14 अक्टूबर को अदालत ने उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया था। सोमवार को दोनों को मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन में स्थित SEM अदालत के सामने पेश किया गया। अब उन्हें बुधवार को दोबारा अदालत में पेश किया जाएगा।
दिल्ली पुलिस ने अदालत से दोनों की न्यायिक हिरासत पांच दिन और बढ़ाने की मांग की थी। हालांकि, अदालत ने दो दिन की हिरासत बढ़ाने का आदेश दिया। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर लगाए गए प्रतिबंधों का उल्लंघन किया था। दूसरी ओर, सीजेपी ने प्रशासन और सरकार पर दोनों प्रवक्ताओं की रिहाई में जानबूझकर देरी करने का आरोप लगाया है।
सौरव दास और आशुतोष रांका की ओर से पेश वकील पुष्प शर्मा ने अदालत की कार्यवाही पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दोनों कानून के दायरे में रहकर अपनी बात रख रहे थे। वकील के मुताबिक, उन्होंने पुलिस से उस खास कॉल को दिखाने के लिए कहा, जिसके आधार पर कार्रवाई की जा रही थी, लेकिन पुलिस की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। उन्होंने संबंधित कानूनी प्रावधान और कथित धमकियों के सबूत दिखाने की मांग भी की, लेकिन उनके अनुसार, इन सवालों का भी जवाब नहीं दिया गया।
पुष्प शर्मा ने आरोप लगाया कि अदालत को आदेश सुनाने में करीब आधा घंटा लगने की बात कही गई थी, लेकिन इसमें लगभग तीन घंटे लगे। उनके मुताबिक, इस दौरान मजिस्ट्रेट ने करीब दो घंटे फोन पर बात की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जमानतदारों को बुलाकर उनसे सवाल किए गए और बाद में उनकी तस्वीरें मेल नहीं खाने की बात कहकर जमानत की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई गई।
वकील ने दावा किया कि जमानतदारों को धमकाया गया और पूरी प्रक्रिया उचित तरीके से नहीं हुई। उन्होंने कहा कि इस आदेश को चुनौती दी जाएगी और मामला उच्च न्यायपालिका में ले जाया जाएगा।
अदालत के आदेश के बाद अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की। इसमें उन्होंने बार एंड बेंच के दो सोशल मीडिया कार्ड लगाए, लेकिन कोई टिप्पणी नहीं लिखी। इनमें से एक कार्ड इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश से संबंधित था, जिसमें हत्या के दोषी की सजा निलंबित किए जाने का जिक्र था। संबंधित व्यक्ति भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहता था। दूसरा कार्ड सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत से जुड़ा था।
सीजेपी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं का विरोध कर रही है। पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी कर रही है।
रविवार को सीजेपी की लीगल हेड रत्ना सिंह ने आरोप लगाया था कि दोनों प्रवक्ताओं की जमानत पर सुनवाई के लिए मजिस्ट्रेट और सरकारी वकील दोपहर 12 बजे से इंतजार के बाद शाम करीब 5:30 बजे पहुंचे। उन्होंने दावा किया कि जमानत पर सुनवाई करने के बजाय मजिस्ट्रेट को मिले कथित धमकी भरे संदेशों पर बहस की गई।
रत्ना सिंह ने सवाल उठाया कि इन संदेशों का दोनों नेताओं की जमानत से क्या संबंध है। उन्होंने यह भी कहा कि सीजेपी ने पुलिस से संदेश भेजने वाले की पहचान कर उसके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की थी, लेकिन इस मांग पर ध्यान नहीं दिया गया।
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