Trending News

क्या नतीजों से पहले ही टूट जाएगी जेडीयू! CM पद को लेकर क्या नीतीश कुमार और लल्लन सिंह में पड़ी दरार?

पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले NDA खेमे में बड़ा सियासी तूफान उठ खड़ा हुआ है. जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के हालिया बयान ने सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अब खुद नीतीश कुमार को उनके ही दल में हाशिए पर डाल दिया गया है?
ललन सिंह ने साफ कहा कि NDA “किसी औपचारिक मुख्यमंत्री चेहरे” के बिना चुनाव लड़ेगा, जबकि नीतीश कुमार सिर्फ “नेतृत्व” करेंगे. यह बयान उस वक्त आया है जब गृह मंत्री अमित शाह पहले ही तीन बार कह चुके हैं कि “चुनाव नीतीश के नेतृत्व में लड़ा जाएगा.” लेकिन अब जब ललन सिंह ने जोड़ दिया कि “CM का फैसला चुनाव के बाद विधायी दल करेगा,” तो राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है — क्या JD(U) में फूट पड़ चुकी है?

JDU में असंतोष या रणनीति?

जदयू के भीतर इस वक्त 9 से ज्यादा सीटों पर टिकट बंटवारे को लेकर नाराजगी है. कई पुराने नेता चुप्पी साधे हैं, और पार्टी के भीतर यह सुगबुगाहट तेज हो गई है कि नीतीश कुमार को सिर्फ “चेहरे” के तौर पर रखकर बाकी कमान अब BJP अपने हाथ में लेना चाहती है.

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि 2020 में भी जब JD(U) को सिर्फ 43 सीटें मिलीं और BJP को 74, तब भी नीतीश को मजबूरी में CM बनाया गया था. लेकिन इस बार BJP साफ संकेत दे रही है कि “नीतीश अब विकल्प नहीं, औपचारिकता हैं.”

विपक्ष का पलटवार: ‘NDA में नीतीश की बेइज्जती’

महागठबंधन ने इस मौके को भुनाते हुए तुरंत हमला बोला. तेजस्वी यादव ने नीतीश को “थका हुआ नेता” बताते हुए खुद को “नए बिहार का चेहरा” घोषित किया.
तेजस्वी ने कहा, “NDA में CM चेहरा नहीं क्योंकि नीतीश जी अब BJP के हाथों की कठपुतली बन गए हैं. बिहार को अब बदलाव चाहिए.”

कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने इसे “JDU की आंतरिक टूट” बताया, जबकि पप्पू यादव ने दावा किया कि “चुनाव बाद नीतीश NDA छोड़ देंगे.”

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

X (Twitter) पर यूज़र्स सवाल उठा रहे हैं — “क्या BJP का प्लान B तैयार है? क्या नीतीश को धीरे-धीरे साइडलाइन किया जा रहा है?” कई लोगों का मानना है कि NDA की नीति दरअसल एक पॉलिटिकल बैकअप प्लान है, ताकि नतीजों के बाद BJP मनपसंद चेहरा सामने ला सके.

NDA का गणित और जोखिम

NDA ने सीट बंटवारे में JD(U) और BJP को 101–101 सीटें दी हैं, लेकिन JD(U) नेताओं को लगता है कि इससे उनकी राजनीतिक हैसियत घट गई है. नीतीश कुमार का EBC+OBC वोटबैंक भले अभी भी NDA के लिए अहम हो, लेकिन अगर JDU में मतभेद बढ़ते हैं, तो यह वोट ट्रांसफर भी खतरे में पड़ सकता है.

ललन सिंह का बयान NDA को एकजुट दिखाने की कोशिश थी, लेकिन अब यह सवाल और गहरा हो गया है — क्या नीतीश कुमार वास्तव में NDA के ‘नेता’ हैं या अब सिर्फ ‘नाम के मुखिया’?

news desk

Recent Posts

भूटान क्यों बढ़ा रहा बौद्ध कूटनीति का दायरा? गेलेफू से मंदिरों तक बदलती रणनीति के पीछे क्या है बड़ा मकसद

थिम्पू: हिमालय में भारत और चीन के बीच स्थित भूटान अपनी सुरक्षा, राष्ट्रीय पहचान और…

3 hours ago

सिक्किम का ये गांव अब रहने लायक नहीं! 32 घर तबाह, 107 लोग राहत शिविर में; उजड़ने से पहले जानिए पीड़ितों को क्या मिलेगा

पश्चिम सिक्किम: लगातार बारिश, भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ ने रिम्बी गांव के सामने बड़ा…

3 hours ago

कर्मचारियों को फिर मिलेगी OPS, शिक्षामित्रों को शिक्षक बनने का मौका; चुनाव से पहले अखिलेश यादव के बड़े ऐलान

लखनऊ: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोमवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को…

3 hours ago

पति के प्राइवेट पार्ट पर पत्नी ने क्यों डाल दिया तेजाब? दो साल पहले हुई थी लव मैरिज, ससुराल पहुंचते ही बिगड़ी बात

आजमगढ़: जिले में शनिवार को एक सनसनीखेज मामला सामने आया, जहां ससुराल पहुंचे युवक के…

3 hours ago

UPI पेमेंट पर नए चार्ज पर रोक की मांग खारिज: सुप्रीम कोर्ट के नोटिस से गरमाया डिजिटल ट्रांजैक्शन का मुद्दा!

क्या अब रोजमर्रा के ऑनलाइन ट्रांजैक्शन करना महंगा होने वाला है? सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार…

4 hours ago

ईवीएम पर फिर मायावती का बड़ा सवाल, बोलीं- बैलेट पेपर से हों चुनाव; चंद्रशेखर आजाद की जीत को लेकर BJP पर लगाया गंभीर आरोप

लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने सोमवार को ईवीएम के इस्तेमाल को लेकर…

4 hours ago