न्यूयॉर्क: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए अपने भाषण में इजरायल की सुरक्षा, ईरान के परमाणु ठिकानों और हमास-हिजबुल्लाह समेत कई मुद्दों पर अपनी सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने इजरायल के विरोधियों को चेतावनी देते हुए कहा कि अब यहूदी असहाय नहीं हैं और अपने लोगों की रक्षा करना जानते हैं। उनके भाषण के दौरान कई देशों के प्रतिनिधि हॉल से बाहर चले गए।
महासभा में नेतन्याहू का नाम पुकारे जाने के बाद इस्लामिक देशों के साथ यूरोपीय संघ और अफ्रीका के कई देशों के प्रतिनिधि हॉल से बाहर निकल गए। नेतन्याहू मंच पर खड़े होकर यह दृश्य देखते रहे।
इसके बाद उन्होंने बाहर जा रहे राजनयिकों पर तंज कसते हुए कहा कि अगर हॉल में कोई नैतिक कायर बैठा है तो वह भी बाहर चला जाए। उनके इस बयान के बाद हॉल में मौजूद कुछ राजनयिकों ने तालियां बजाईं।
नेतन्याहू ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर की गई कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि इन्हें नष्ट करना बेहद कठिन था, लेकिन उनके लिए प्रधानमंत्री के तौर पर यह सबसे आसान फैसलों में से एक था। उनका कहना था कि अगर ऐसा नहीं किया जाता तो इजरायल के सामने बड़ा खतरा पैदा हो सकता था।
उन्होंने यह भी कहा कि इजरायल अपनी सुरक्षा के लिए लड़ना जारी रखेगा और अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
नेतन्याहू ने अरब देशों के रुख पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि इजरायल अपनी रक्षा करते हुए उन देशों की भी रक्षा कर रहा है, जिनके प्रतिनिधि उनके भाषण के दौरान हॉल से बाहर चले गए।
उन्होंने दावा किया कि कुछ देशों के नेताओं ने निजी तौर पर ईरान के परमाणु हथियारों को नष्ट करने के लिए इजरायल को धन्यवाद दिया है। नेतन्याहू ने इसे विरोधाभासी रवैया बताया।
गाजा और गोलान हाइट्स का जिक्र करते हुए नेतन्याहू ने इजरायल के क्षेत्रीय दावों और इतिहास से जुड़े अपने तर्क सामने रखे। उन्होंने कहा कि यहूदी प्राचीन काल से गोलान हाइट्स से जुड़े रहे हैं।
उन्होंने 1967 के छह दिवसीय युद्ध का भी उल्लेख किया और इजरायल पर उपनिवेशवाद के आरोपों को खारिज किया। इन दावों के समर्थन में उन्होंने इजरायल के इतिहास और उसके क्षेत्रफल का हवाला दिया।
नेतन्याहू ने कहा कि पिछले तीन वर्षों से इजरायली सैनिक सात मोर्चों पर लड़ रहे हैं। उन्होंने हमास, हिजबुल्लाह, हूती, ईरान, इराक और सीरिया में मौजूद मिलिशिया तथा यहूदिया और सामरिया में फिलिस्तीनी आतंकवादियों का जिक्र किया।
उन्होंने दावा किया कि इन सभी समूहों का उद्देश्य इजरायल को खत्म करना था, लेकिन इजरायल ने उन्हें जवाब दिया।
इजरायली प्रधानमंत्री ने अमेरिकी सहयोग का जिक्र करते हुए दावा किया कि इजरायल ने ईरान की सेना, नौसेना, वायुसेना और परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाया। उन्होंने हमास और हिजबुल्लाह के खिलाफ की गई कार्रवाई का भी उल्लेख किया।
हिजबुल्लाह के संदर्भ में नेतन्याहू ने पेजर हमले का जिक्र करते हुए कहा कि संगठन के नेता मारे जा चुके हैं और उसका मनोबल टूट चुका है।
नेतन्याहू ने कहा कि जिन आतंकवादी संगठनों को उन्होंने दुनिया के लिए बड़ा खतरा बताया, उनमें से बचे हुए सदस्य फिर से संगठित होने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि ये समूह इजरायली नागरिकों को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इन समूहों के हमलों का असर सिर्फ इजरायल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अलग-अलग देशों के नागरिक भी प्रभावित हुए हैं।
नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भी जिक्र किया। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में ट्रंप को इजरायल का महत्वपूर्ण साझेदार बताया और उनके नेतृत्व के लिए धन्यवाद दिया।
नेतन्याहू ने कहा कि अमेरिका और इजरायल ने अपनी सुरक्षा के साथ-साथ व्यापक स्तर पर सभ्यता की रक्षा के लिए मिलकर काम किया है।
नेतन्याहू ने कतर पर इजरायल के खिलाफ कथित तौर पर प्रचार करने के लिए भारी रकम खर्च करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य युवाओं के बीच इजरायल, अमेरिका और पश्चिम के प्रति नफरत पैदा करना था।
उन्होंने कतर पर 7 अक्टूबर के हमले में शामिल हमास के लोगों को शरण देने का भी आरोप लगाया।
नेतन्याहू ने तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने एर्दोगन को तानाशाह बताते हुए हमास के नेताओं को शरण देने का आरोप लगाया।
इसके अलावा उन्होंने कुर्द नागरिकों की हत्या, आर्मेनियाई नरसंहार से इनकार और पत्रकारों तथा विपक्षी नेताओं को जेल भेजने जैसे आरोप भी लगाए। ये आरोप नेतन्याहू ने अपने भाषण के दौरान लगाए।
न्यूयॉर्क के मेयर ममदानी को निशाने पर लेते हुए नेतन्याहू ने कहा कि शहर में कई यहूदी अब खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करते। उन्होंने ममदानी पर हमास के समर्थन से जुड़े लोगों की प्रशंसा करने और कुछ विवादित बयानों वाले लोगों को अपने करीब रखने का आरोप लगाया।
नेतन्याहू ने ममदानी पर इजरायल के खिलाफ नरसंहार के आरोप लगाने का भी जिक्र किया और कहा कि उन्होंने अपनी आवाज दबाने की कोशिशों के बावजूद संयुक्त राष्ट्र में अपनी बात रखी है।
अपने भाषण के अंत में नेतन्याहू ने दुनिया भर के यहूदियों को संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यहूदी अब असहाय पीड़ित नहीं हैं। उन्होंने इजरायल के पास अपनी सेना और अपने लोगों की रक्षा करने की क्षमता होने की बात कही।
नेतन्याहू ने दुनिया भर के यहूदियों से सिर ऊंचा रखने और डरने के बजाय खड़े होने की अपील की। साथ ही उन्होंने उन लोगों से भी इजरायल का साथ देने को कहा, जो उनके अनुसार सच्चाई और न्याय की रक्षा करना चाहते हैं।
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