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अंटार्कटिका के ‘ब्लड फॉल्स’ का रहस्य सुलझा: वैज्ञानिक जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

अंटार्कटिका के बर्फीले रेगिस्तान में पिछले 100 सालों से भी अधिक समय से वैज्ञानिकों को हैरान करने वाले ‘ब्लड फॉल्स’ (खूनी झरने) की गुत्थी अंततः सुलझा ली गई है। सफेद बर्फ की चादर के बीच से निकलता यह गहरा लाल झरना किसी डरावनी फिल्म के दृश्य जैसा लगता है, लेकिन हालिया रिसर्च ने इसके पीछे के भूवैज्ञानिक (Geological) और जैविक (Biological) कारणों को स्पष्ट कर दिया है।

लोहे के ‘नैनोस्फेयर्स’

जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने आधुनिक ट्रांसमिशन इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप का उपयोग करके झरने के पानी के नमूनों की जांच की। उन्होंने पाया कि पानी में ‘आयरन नैनोस्फेयर्स’ (Iron Nanospheres) मौजूद हैं। ये कण लोहे, सिलिकॉन, कैल्शियम और एल्युमीनियम से बने होते हैं।

जब यह प्राचीन पानी ग्लेशियर के नीचे से बाहर निकलता है और हवा के संपर्क में आता है, तो इसमें मौजूद लोहा ऑक्सीजन के साथ मिलकर ऑक्सीडाइज हो जाता है। यह ठीक वैसी ही प्रक्रिया है जैसे लोहे पर जंग लगता है, जिससे पानी का रंग तुरंत लाल हो जाता है।

जमता क्यों नहीं है यह पानी?

अंटार्कटिका के -17°C तापमान में भी यह पानी झरने की तरह बहता रहता है। इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं: इस पानी में समुद्र के पानी की तुलना में तीन गुना अधिक नमक है, जिससे इसका जमाव बिंदु (Freezing Point) काफी नीचे गिर जाता है। जब पानी जमता है, तो वह गर्मी छोड़ता है। ग्लेशियर के अंदरूनी दबाव और नमक के कारण यह पानी तरल बना रहता है।

 लाखों सालों से दबी हुई ‘दूसरी दुनिया’

वैज्ञानिकों ने इस झरने के स्रोत की खोज की, जो ग्लेशियर के नीचे लगभग 20 लाख साल पुरानी एक विशाल झील है। बिना सूरज, बिना हवा: इस झील में कोई सूरज की रोशनी या ऑक्सीजन नहीं पहुंचती। वैज्ञानिकों ने वहां ऐसे बैक्टीरिया पाए हैं जो लोहे और सल्फेट को ‘खाकर’ जिंदा हैं। वे ऑक्सीजन के बजाय लोहे से ऊर्जा लेते हैं।

 अंतरिक्ष विज्ञान के लिए महत्व

नासा (NASA) के वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज ब्रह्मांड में जीवन की तलाश के लिए महत्वपूर्ण है। अगर पृथ्वी पर ऐसी भीषण परिस्थितियों में जीवन संभव है, तो मंगल (Mars) के ठंडे वातावरण या बृहस्पति के चंद्रमा ‘यूरोपा’ की बर्फीली सतह के नीचे भी जीवन होने की प्रबल संभावना है।

अंटार्कटिका का यह खूनी झरना कोई रहस्यमयी घटना नहीं, बल्कि प्रकृति की एक अद्भुत रासायनिक प्रयोगशाला है, जो हमें करोड़ों सालों के इतिहास और पृथ्वी के बाहर जीवन की संभावनाओं की झलक दिखाती है।

news desk

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