Trending News

मक्का-मदीना पर मिसाइल हमलों से मचा हड़कंप, हूतियों ने आरोपों को बताया झूठ! सऊदी के तेल ठिकानों पर हमले का दावा, जानिए पूरा मामला

नई दिल्ली: सऊदी अरब में शनिवार, 24 अक्टूबर को मिसाइल हमलों की खबरों के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गईं। सऊदी अधिकारियों के मुताबिक, मक्का और मदीना क्षेत्रों की ओर आ रही दो बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही रोक दिया गया। इसके बाद कई इलाकों में मलबा गिरने की जानकारी सामने आई। हालांकि, यमन के हूती विद्रोहियों ने दोनों पवित्र शहरों को निशाना बनाने के आरोपों को खारिज कर दिया। समूह का दावा है कि उसकी कार्रवाई सऊदी अरब के तेल ठिकानों, हवाई अड्डों और सैन्य सुविधाओं के खिलाफ थी। दोनों पक्षों के बयानों के बीच अब तक सभी कथित हमलों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

मक्का-मदीना की ओर मिसाइलें, सऊदी अधिकारियों ने क्या बताया?

सऊदी अरब की सिविल डिफेंस एजेंसी के मुताबिक, मक्का और मदीना क्षेत्रों की ओर आ रही दो बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के बाद उनका मलबा अलग-अलग स्थानों पर गिरा। रिपोर्ट में मक्का के बाहर वादी मुगमास के अलावा जेद्दा, ताइफ और रबिघ में भी मलबा मिलने की जानकारी दी गई है।

अधिकारियों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि मलबा गिरने की घटनाओं से निपटने के लिए संबंधित क्षेत्रों में टीमें तैनात की गईं। इससे पहले मक्का प्रांत के साथ जेद्दा, ताइफ और यानबू के लोगों के लिए हवाई खतरे को लेकर अलर्ट जारी किया गया था। करीब 10 मिनट बाद अधिकारियों ने तत्काल खतरा टलने की जानकारी दी।

सिविल डिफेंस ने लोगों से सुरक्षा निर्देशों का पालन करने, घटनास्थलों पर भीड़ नहीं लगाने और मिसाइल या उसके मलबे से जुड़ी घटनाओं की वीडियो रिकॉर्डिंग से बचने की अपील की। आपात स्थिति में 911 पर संपर्क करने की सलाह भी दी गई।

हूतियों का इनकार, याह्या सारी ने क्या दावा किया?

हूती समूह के सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने मक्का और मदीना को निशाना बनाने के आरोपों को खारिज किया। समाचार एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने सऊदी अरब के दावे को झूठ बताया।

हूतियों का कहना है कि उनके सैन्य अभियानों का मकसद इस्लाम के पवित्र शहरों पर हमला करना नहीं था। समूह ने दावा किया कि उसकी कार्रवाई सऊदी अरब के तेल ठिकानों, हवाई अड्डों और सैन्य सुविधाओं के खिलाफ थी।

इस मामले में सऊदी अधिकारियों और हूतियों के बयानों को अलग-अलग समझना जरूरी है। सऊदी पक्ष ने मिसाइलों को रोकने और मलबा गिरने की जानकारी दी है, जबकि हूतियों ने पवित्र शहरों को निशाना बनाने से इनकार किया है। उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट नहीं है कि सभी कथित हमलों में कोई मिसाइल अपने लक्ष्य तक पहुंची या नहीं।

सऊदी के किन तेल ठिकानों और हवाई अड्डों को निशाना बनाने का दावा?

हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने 24 अक्टूबर को सऊदी अरब के कई महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमले करने का दावा किया। इनमें रियाद का किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट, यानबू में सऊदी अरामको की एक सुविधा और रबिघ की तेल रिफाइनरी शामिल हैं।

समूह के मुताबिक, कच्चे तेल की पंपिंग सुविधाओं और सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को भी निशाना बनाया गया। इसके अलावा दम्माम के किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट, नज्रान के एक हवाई अड्डे और खमीस मुशैत के एक हवाई अड्डे पर हमले का दावा किया गया।

वहीं, सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा कि यानबू और ताइफ की ओर दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट कर दिया गया। सऊदी अधिकारियों ने रबिघ समेत कई स्थानों पर मलबा मिलने की जानकारी भी दी।

हालांकि, हूतियों की ओर से बताए गए सभी ठिकानों पर हमले होने की सऊदी अधिकारियों ने पुष्टि नहीं की है। इसलिए इन दावों को फिलहाल हूती समूह के बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए। यह भी स्पष्ट नहीं है कि कथित हमलों में बताए गए सभी लक्ष्य प्रभावित हुए या कुछ हमलों को बीच में ही रोक दिया गया।

अदन में भी मिसाइल हमले का आरोप, यमन में क्या हुआ?

तनाव की खबरें सिर्फ सऊदी अरब तक सीमित नहीं रहीं। यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने हूतियों पर अदन शहर में तटरक्षक बल के ठिकानों पर तीन बैलिस्टिक मिसाइलें दागने का आरोप लगाया।

यमन के गृह मंत्रालय के मुताबिक, दो मिसाइलें तटरक्षक बल के मुख्यालय पर गिरीं, जबकि तीसरी तवाही इलाके में तटरक्षक बल की एक इमारत से टकराई।

दूसरी ओर, हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने कहा कि उनके बलों ने अदन में सऊदी समर्थित सैन्य जमावड़ों को निशाना बनाया। उन्होंने अल-नस्र कैंप और एक नौसैनिक सैन्य अड्डे का उल्लेख किया। उनका आरोप था कि इन स्थानों पर सऊदी अधिकारी सैन्य गतिविधियों की निगरानी कर रहे थे।

दोनों पक्षों के दावों के बीच यमन के लंबे समय से जारी संघर्ष की पृष्ठभूमि भी अहम है। यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार और हूती विद्रोहियों के बीच वर्षों से लड़ाई चल रही है।

2022 का युद्धविराम भी दबाव में, क्षेत्रीय तनाव क्यों बढ़ा?

सऊदी अरब और हूतियों के बीच बढ़ता तनाव 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से हुए युद्धविराम के लिए चुनौती बन सकता है। इस समझौते के बाद सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन और हूतियों के बीच सीमा पार हमलों में काफी कमी आई थी।

सऊदी नेतृत्व वाला गठबंधन यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करता है, जबकि हूतियों का राजधानी सना और यमन के बड़े उत्तरी हिस्से पर नियंत्रण है।

रिपोर्ट में ताजा घटनाक्रम को ईरान से जुड़े व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष के बीच बढ़ते तनाव से भी जोड़ा गया है। ईरान समर्थित हूतियों की ओर से सऊदी ठिकानों पर कार्रवाई के दावों ने क्षेत्र में संघर्ष बढ़ने की आशंकाओं को फिर चर्चा में ला दिया है।

इसी महीने की शुरुआत में हूतियों ने विमानन कंपनियों को सऊदी हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल को लेकर चेतावनी दी थी। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक, मक्का और मदीना के ऊपर के हवाई क्षेत्र को इस चेतावनी से अलग रखा गया था।

सऊदी अरब जाने वाली उड़ानों पर क्या पड़ा असर?

क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बीच सऊदी अरब के लिए हवाई सेवाओं पर भी असर पड़ने की जानकारी सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने रियाद और दम्माम आने-जाने वाली उड़ानों का निलंबन 7 नवंबर 2026 तक बढ़ा दिया है। जेद्दा की उड़ानें 31 अक्टूबर 2026 तक निलंबित रखने की घोषणा की गई।

एयर इंडिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट के जरिए बताया कि क्षेत्र की मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। रिपोर्ट में इंडिगो और अकासा एयर की ओर से भी सऊदी अरब के शहरों के लिए उड़ानें रद्द किए जाने का उल्लेख है।

ऐसे हालात में यात्रियों को एयरपोर्ट के लिए निकलने से पहले अपनी एयरलाइन से उड़ान की ताजा स्थिति की पुष्टि करनी चाहिए। मौजूदा घटनाक्रम के बीच उड़ानों का संचालन सुरक्षा परिस्थितियों और एयरलाइन के फैसलों पर निर्भर कर सकता है।

फिलहाल, मक्का-मदीना की ओर मिसाइलें दागे जाने के सऊदी दावे और हूतियों के इनकार के बीच कई सवाल बने हुए हैं। सऊदी अरब के तेल ठिकानों और सैन्य सुविधाओं पर हमलों को लेकर भी सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में आधिकारिक बयान और सुरक्षा एजेंसियों की जानकारी से स्थिति की अधिक स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकती है।

vineet verma

Recent Posts

ईरान की इजरायल को बड़ी चेतावनी, ‘एक घंटे से भी कम में रहने लायक नहीं छोड़ेंगे’, अहम ठिकानों का नक्शा साझा

नेतन्याहू के सत्ता परिवर्तन वाले बयान के बाद ईरान का पलटवार पानी, बिजली और तेल…

12 minutes ago

डाकू रत्नाकर से महर्षि वाल्मीकि तक का सफर! 26 अक्टूबर को क्यों मनाई जाएगी जयंती, जानें बदलाव की यह रोचक कथा

नई दिल्ली: महर्षि वाल्मीकि जयंती सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को मनाई जाएगी। महर्षि वाल्मीकि को…

1 hour ago

2027 वर्ल्ड कप के लिए रहाणे ने चुने भारत के 5 तेज गेंदबाज, बुमराह पहली पसंद… शमी-हर्षित का क्यों कटा पत्ता?

नई दिल्ली: आईसीसी वनडे वर्ल्ड कप 2027 को लेकर टीम इंडिया की तैयारियों और संभावित…

2 hours ago

6 महीने से रिलीज को तरस रही सलमान खान की ‘मातृभूमि’, दोबारा स्क्रीनिंग के बाद भी नहीं मिली हरी झंडी… आखिर कहां अटकी फिल्म?

नई दिल्ली: सलमान खान की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ की रिलीज…

2 hours ago

दिल्ली नहीं, यूपी का बड़ौत बना देश का सबसे प्रदूषित शहर! AQI 324 पहुंचा, मेरठ भी दूसरे नंबर पर; आखिर हवा में इतना जहर क्यों?

बागपत: दीपावली से पहले उत्तर प्रदेश के कई शहरों में वायु प्रदूषण चिंता बढ़ाने लगा…

2 hours ago