यूपी के मेरठ में ललिता गौतम हत्याकांड (जिसका शव 17 मई को मिला था और मुख्य आरोपी जेल में है) की जांच के विरोध में कलेक्ट्रेट पर अचानक भारी बवाल हो गया। कमिश्नरी चौराहे पर जुटी भीड़ ने न सिर्फ कचहरी का मुख्य रास्ता जाम किया, बल्कि जिलाधिकारी कार्यालय का गेट तोड़ने की भी कोशिश की। इस दौरान भीड़ को रोकने गई पुलिस टीम पर पथराव कर दिया गया, जिसमें महिला पुलिसकर्मियों समेत 11 जवान घायल हो गए।
इस हिंसक झड़प के बाद पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को खदेड़ा और 13 नामजद समेत 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
इस पूरे घटनाक्रम में तब नया मोड़ आ गया जब सोशल मीडिया पर दो वीडियो तेजी से वायरल हो गए:
विपक्षी नेताओं ने इस घटना को लेकर योगी सरकार और यूपी पुलिस पर दलित विरोधी होने का आरोप लगाया है:
अखिलेश यादव (एक्स पर): “भाजपा राज में पुलिस अन्याय का रिकॉर्ड तोड़ रही है। मेरठ में दलित समाज की बेटी के लिए न्याय की आवाज उठाने पर प्रशासन द्वारा पीड़ित परिवार सहित अन्य लोगों पर किया प्रहार और लाठीचार्ज बेहद निंदनीय है।”
सांसद चंद्रशेखर आजाद: “पीड़ित परिजनों पर लाठीचार्ज भाजपा सरकार की अनुसूचित जाति विरोधी कार्यशैली दर्शाता है। मैं खुद मेरठ पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात करूंगा।”
पुलिस की इनसाइड स्टोरी: ‘बाहरी अपराधियों ने भोले-भाले परिवार को भड़काया’
सीओ ब्रह्मपुरी सौम्या अस्थाना और एसएसपी के मुताबिक, इस बवाल के पीछे पीड़ित परिवार नहीं बल्कि बाहरी जिलों के शातिर अपराधी शामिल थे।
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