नज़रबंद किए गए नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय
उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और सपा के वरिष्ठ नेता माता प्रसाद पांडेय को शुक्रवार सुबह उनके सरकारी आवास (वृंदावन कॉलोनी) पर नजरबंद कर दिया गया. पुलिस और प्रशासन के कई अधिकारी वहां मौजूद थे और उन्हें बरेली जाने से रोक दिया गया.
दरअसल, समाजवादी पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल बरेली जाने वाला था, जिसकी अगुवाई खुद माता प्रसाद पांडेय करने वाले थे. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर यह टीम बरेली जाकर वहां हाल ही में हुई पुलिस कार्रवाई और कुछ लोगों की गिरफ्तारी की हकीकत की जांच करने वाली थी. लेकिन रवाना होने से पहले ही प्रशासन ने एहतियातन उन्हें घर में नजरबंद कर दिया, ताकि वो बरेली न जा सकें.
नजरबंदी के दौरान घर के बाहर रहा कड़ा पुलिस पहरा
माता प्रसाद पांडेय को नजरबंद किए जाने के दौरान उनके वृंदावन स्थित आवास के बाहर सुबह से ही भारी संख्या में पुलिस और पीएसी बल तैनात रहा. सुरक्षा इतनी सख्त थी कि किसी भी सपा कार्यकर्ता या प्रतिनिधि को भीतर जाने की इजाज़त नहीं दी गई. मीडिया को भी अंदर जाने नहीं दिया गया. वहां मौजूद लोगों के मुताबिक, जब समाजवादी पार्टी के कुछ नेता माता प्रसाद पांडेय से मिलने पहुंचे, तो पुलिस ने उन्हें गेट पर ही रोक दिया और कहा कि वे वापस चले जाएं. माहौल पूरी तरह से कड़े सुरक्षा घेरे में रहा और किसी को भी मिलने नहीं दिया गया.
माता प्रसाद पांडेय का बयान ?
मीडिया से बातचीत करते हुए माता प्रसाद पांडेय ने कहा कि उन्हें बरेली जाने नहीं दिया गया. उनका कहना था कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने उन्हें वहां भेजा था ताकि वो उन लोगों से मिल सकें जिन्हें बिना किसी ठोस वजह के हिरासत में लिया गया है. लेकिन सरकार और प्रशासन ने उन्हें रवाना होने से पहले ही रोक दिया. उन्होंने इस बात पर नाराजगी जताई कि अगर उन्हें रोकना ही था तो प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक सूचना या नोटिस जारी किया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. माता प्रसाद पांडेय ने कहा कि पुलिस और प्रशासन न तो कानून का पालन कर रहे हैं और न ही नागरिकों के लोकतांत्रिक हक की इज्जत कर रहे हैं.
क्या है मामला
बताया जा रहा है कि बरेली में हाल ही में हुई एक संवेदनशील घटना के बाद पुलिस ने बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया है. समाजवादी पार्टी का दावा है कि जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें कई ऐसे हैं जिनका उस घटना से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन उन्हें जानबूझकर फंसाया जा रहा है. इसी मामले को गंभीरता से लेते हुए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक जांच टीम गठित करने का फैसला किया. इस टीम में पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधायक शामिल थे, जिसकी अगुवाई नेता विपक्ष माता प्रसाद पांडेय कर रहे थे. टीम का मकसद था कि वे बरेली जाकर हालात की हकीकत जानें और जिन लोगों के साथ अन्याय हुआ है, उनसे मिलकर सच्चाई सामने लाएं.
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