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नेपाल की विनाशकारी बाढ़ से बाल-बाल बचीं मानसी पारेख, 24 घंटे का फर्क बना जिंदगी की ढाल; वीडियो में सुनाया पूरा अनुभव

काठमांडू: नेपाल में आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है और हजारों लोग इसकी चपेट में आए हैं. इसी आपदा के बीच अभिनेत्री मानसी पारेख भी बाल-बाल बच गईं. अभिनेत्री ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर अपनी कैलाश यात्रा का अनुभव बताया और कहा कि कैलाश के पूर्वी छोर के दर्शन के बाद उन्हें गहरी शांति का अनुभव हुआ.

24 घंटे की देरी ने बचाई जान

मानसी पारेख ने बताया कि जिस दिन नेपाल में यह घटना हुई, उस समय वह अपने साथियों के साथ नौदाना जाने की तैयारी कर रही थीं. उन्हें वहां स्थित इमिग्रेशन बिल्डिंग तक पहुंचना था. अभिनेत्री के मुताबिक, जिस स्थान पर बाढ़ आई, वहां उन्हें अगले दिन जाना था, लेकिन अब वह इमारत ही नहीं बची है. उन्होंने कहा कि महज 24 घंटे के अंतराल ने उनकी जान बचा दी, क्योंकि अगर यात्रा तय समय पर होती तो वे भी उसी जगह मौजूद हो सकती थीं.

अभिनेत्री ने यह भी बताया कि ईशा फाउंडेशन के समूह के करीब 80 लोग लापता हैं.

फिलहाल चीन के होटल में हैं अभिनेत्री

मानसी पारेख ने बताया कि वह इस समय चीन के एक होटल में ठहरी हुई हैं. उन्होंने कहा कि मानसरोवर के किनारे ध्यान करने के बाद उन्होंने कैलाश यात्रा की शुरुआत की. इंस्टाग्राम पर साझा किए गए वीडियो में उन्होंने यात्रा के शुरुआती पड़ाव और उससे जुड़े अनुभव भी दिखाए हैं.

वीडियो में अभिनेत्री ने बताया कि ठंड के मौसम में कैलाश यात्रा पर निकलने से पहले नाक में कैस्टर ऑयल लगाना जरूरी होता है, क्योंकि ऐसा नहीं करने पर नाक से खून आने की आशंका रहती है. उन्होंने कहा कि पहाड़ी इलाकों में मेकअप की जरूरत नहीं होती, लेकिन पर्याप्त मात्रा में सनब्लॉक लगाना बेहद जरूरी है.

उन्होंने यह भी बताया कि यात्रा शुरू करने से पहले उन्होंने भरपेट नाश्ता किया, अपना बैकपैक तैयार किया और फिर टीम के साथ आगे बढ़ीं. रास्ते में उन्हें खराब मौसम का भी सामना करना पड़ा.

यमद्वार से शुरू हुई आध्यात्मिक यात्रा

वीडियो में मानसी पारेख ने बताया कि उन्होंने अपनी यात्रा की शुरुआत यमद्वार से की. उनके अनुसार, इसका अर्थ है कि व्यक्ति अपनी सभी परेशानियों को पीछे छोड़कर एक नए आध्यात्मिक स्वरूप की ओर आगे बढ़ता है.

उन्होंने वीडियो में कैलाश पर्वत के पूर्वी छोर के दर्शन का अनुभव भी साझा किया. इसके बाद यात्रा का एक किलोमीटर का हिस्सा उन्होंने घोड़े पर बैठकर पूरा किया.

इस बार की कैलाश यात्रा क्यों मानी जा रही है खास

मानसी पारेख ने अपने वीडियो में बताया कि तिब्बती संस्कृति के अनुसार इस समय ‘ईयर ऑफ द हॉर्स’ चल रहा है. उनके मुताबिक, इस वर्ष एक बार पैदल कैलाश यात्रा करना 13 बार यात्रा करने के बराबर माना जाता है. उन्होंने बताया कि ‘ईयर ऑफ द हॉर्स’ हर 12 साल में एक बार आता है.

vineet verma

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