नई दिल्ली में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद अपनी याचिका लेकर पहुंचीं और चुनाव आयोग के खिलाफ खुलकर अपनी बात रखी। सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी की याचिका पर चुनाव आयोग को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई सोमवार को तय की है। यह फैसला 4 फरवरी 2026 को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुनाया।
“सिर्फ बंगाल को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा?”
कोर्ट में ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल को जानबूझकर टारगेट किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के जरिए बड़े पैमाने पर मतदाता सूची से नाम हटाए जा रहे हैं, जबकि असम और दूसरे उत्तरी राज्यों में, जहां चुनाव होने वाले हैं, ऐसी कोई प्रक्रिया लागू नहीं की गई है। ममता ने सवाल उठाया कि जब बाकी राज्यों में SIR नहीं हो रहा, तो सिर्फ बंगाल में ही इसे क्यों लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग उनकी शिकायतें सुन ही नहीं रहा और उन्होंने छह पत्र लिखे, लेकिन एक का भी जवाब नहीं मिला।
“यह नाम जोड़ने नहीं, नाम काटने की प्रक्रिया है”
ममता बनर्जी ने आगे कहा कि SIR का इस्तेमाल नए मतदाताओं को जोड़ने के बजाय नाम हटाने के लिए किया जा रहा है। उनके मुताबिक लाखों जिंदा लोगों को ‘मृत’ घोषित कर दिया गया है, महिलाओं के नाम ज्यादा काटे जा रहे हैं और कई मामलों में सरकारी दस्तावेजों को भी मान्य नहीं माना जा रहा। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को भेदभावपूर्ण बताया। ममता की ओर से वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने भी कोर्ट में दलीलें रखीं और मांग की कि SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम न हटाए जाएं।
ममता बनर्जी ने याचिका में SIR से जुड़े निर्देशों को रद्द करने और 2026 के विधानसभा चुनाव 2025 की पुरानी मतदाता सूची के आधार पर कराने की मांग की है। टीएमसी नेता कल्याण बनर्जी ने कहा कि कोर्ट में ममता की बात लोकतंत्र और निष्पक्ष चुनाव को बचाने की अपील थी। वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि SIR मतदाता सूची की शुद्धता के लिए जरूरी है। अब सबकी नजर सोमवार को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी है, जब चुनाव आयोग कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखेगा।