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AAP में बड़ा फेरबदल: राघव चड्ढा हटे, अशोक मित्तल बने राज्यसभा के डिप्टी लीडर, क्या पार्टी में भी होगी छुट्ट ?

आम आदमी पार्टी (AAP) ने एक बड़े और चौंकाने वाले घटनाक्रम में राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को उच्च सदन में ‘डिप्टी लीडर’ के पद से हटा दिया है। पार्टी ने आधिकारिक तौर पर राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर सूचित किया है कि अब उनकी जगह अशोक मित्तल यह कार्यभार संभालेंगे।

बोलने के समय पर भी पाबंदी

पार्टी की नाराजगी केवल पद छीनने तक ही सीमित नहीं रही। खबरों के मुताबिक, ‘आप’ ने सचिवालय से यह भी अनुरोध किया है कि राघव चड्ढा को पार्टी के कोटे से आवंटित किया जाने वाला बोलने का समय न दिया जाए। संसदीय राजनीति में इसे किसी सदस्य को हाशिए पर धकेलने का सबसे बड़ा संकेत माना जाता है।

आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर मचे घमासान के बीच अब राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा (Raghav Chadha) को लेकर बड़ी खबरें सामने आ रही हैं। पार्टी द्वारा उनके खिलाफ लिए गए एक्शन के पीछे कई गंभीर कारण बताए जा रहे हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि आखिर वो कौन सी वजहें थीं, जिन्होंने चड्ढा और पार्टी के बीच दूरियां पैदा कर दीं।

1. बड़े नेताओं की जमानत पर साधी चुप्पी

सबसे प्रमुख कारण दिल्ली आबकारी नीति (Delhi Excise Policy Case) से जुड़ा माना जा रहा है। जब मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया जैसे दिग्गज नेताओं को जमानत मिली, तो राघव चड्ढा की तरफ से कोई खास प्रतिक्रिया या उत्साह देखने को नहीं मिला। उनकी इस ‘खामोशी’ को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने गंभीरता से लिया है।

2. राज्यसभा में ‘अकेले’ सारा समय लेने का आरोप

पार्टी के भीतर एक शिकायत यह भी रही कि राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के कोटे का अधिकांश समय राघव चड्ढा खुद ही ले लेते थे। इस वजह से पार्टी के अन्य अनुभवी सांसदों को अपनी बात रखने का या तो मौका ही नहीं मिलता था या बहुत कम समय मिलता था। इसे लेकर संगठन के भीतर असंतोष बढ़ रहा था।

3. संगठन के कार्यों में कम होती दिलचस्पी

सियासी गलियारों में यह दावा किया जा रहा है कि राघव चड्ढा पिछले कुछ समय से आम आदमी पार्टी (AAP) के संगठनात्मक कार्यों और गतिविधियों में दिलचस्पी नहीं ले रहे थे। हालांकि, वह व्यक्तिगत रूप से उठाए गए कुछ मुद्दों को लेकर चर्चा में जरूर रहे, लेकिन पार्टी के मुश्किल दौर (उतार-चढ़ाव) में उनकी सक्रियता न के बराबर रही।

4. संजय सिंह का बयान और दल-बदल की अटकलें

राघव चड्ढा के किसी अन्य दल में शामिल होने की अटकलों पर जब सांसद संजय सिंह से सवाल किया गया, तो उनका जवाब चौंकाने वाला था। संजय सिंह ने कहा था कि “यह सवाल आपको उन्हीं से पूछना चाहिए। लेकिन अगर वह ऐसा (पार्टी छोड़ने का फैसला) करते हैं, तो उनके खिलाफ आवाज उठाने वाला सबसे पहला व्यक्ति मैं रहूंगा।”

हालांकि, उस वक्त संजय सिंह ने इन अटकलों को खारिज किया था, लेकिन उनके तेवरों ने साफ कर दिया था कि पार्टी के अंदर सब कुछ ठीक नहीं है।

क्या होगा राघव चड्ढा का अगला कदम?

राघव चड्ढा का राजनीतिक सफर काफी तेज रहा है। राज्यसभा जाने से पहले वह दिल्ली की राजिंदर नगर सीट से विधायक थे। 2022 में पंजाब विधानसभा चुनाव में पार्टी की प्रचंड जीत के बाद, उन्हें ईनाम के तौर पर राज्यसभा भेजा गया था। अब इस हालिया एक्शन के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या राघव चड्ढा पार्टी में बने रहेंगे या कोई नया रास्ता चुनेंगे?

news desk

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