महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। DGP रश्मि शुक्ला द्वारा सौंपी गई एक गोपनीय रिपोर्ट ने महा विकास अघाड़ी (MVA) सरकार के दौरान हुए एक कथित षड्यंत्र का पर्दाफाश किया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2021-22 में तत्कालीन विपक्षी नेता देवेंद्र फडणवीस और कैबिनेट मंत्री एकनाथ शिंदे को झूठे मुकदमों में फंसाकर गिरफ्तार करने की पूरी तैयारी कर ली गई थी।
साजिश का मास्टरमाइंड कौन?
स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) और रश्मि शुक्ला की रिपोर्ट में पूर्व DGP संजय पांडे को इस पूरी साजिश का असली मास्टरमाइंड बताया गया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि संजय पांडे ने ठाणे के तत्कालीन डीसीपी लक्ष्मीकांत पाटिल और एसीपी सरदार पाटिल पर दबाव बनाया था कि वो 2016 के एक पुराने ULC (अर्बन लैंड सीलिंग) घोटाले के मामले को दोबारा खोलें और उसमें किसी भी तरह फडणवीस और शिंदे का नाम शामिल करें।
रिपोर्ट के 3 सबसे चौंकाने वाले खुलासे!
जांच एजेंसियों के हाथ एक ऐसी ऑडियो क्लिप लगी है, जिसमें कथित तौर पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ये चर्चा कर रहे हैं कि फडणवीस को कैसे घेरा जाए और किन धाराओं के तहत उन्हें जेल भेजा जाए।
रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस अधिकारियों ने बिल्डरों और गवाहों को डराया-धमकाया था ताकि वे नेताओं के खिलाफ बयान दे सकें।
एसआईटी ने निष्कर्ष निकाला है कि ये मामला कानूनी जांच का नहीं, बल्कि पूरी तरह से ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ का था, जिसमें पुलिस तंत्र का इस्तेमाल हथियारों की तरह किया गया।
तीन अधिकारियों पर गिर सकती है गाज!
इस सनसनीखेज रिपोर्ट के आधार पर, सरकार ने तीन प्रमुख लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की सिफारिश की है, जिसमे संजय पांडे (पूर्व DGP, महाराष्ट्र), लक्ष्मीकांत पाटिल (तत्कालीन DCP) और सरदार पाटिल (रिटायर्ड ACP) शामिल है|
“केस बनाओ और अरेस्ट करो…” कथित तौर पर ये वे शब्द थे जो संजय पांडे ने अपने अधीनस्थ अधिकारियों से कहे थे, जिनका उल्लेख रश्मि शुक्ला ने अपनी रिपोर्ट में किया है।
इस खुलासे के बाद महाराष्ट्र में सत्ता पक्ष (महायुति) आक्रामक हो गया है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि ये लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय है। वहीं, उद्धव ठाकरे गुट और अन्य विपक्षी दलों ने इसे ‘चुनावी स्टंट’ और ‘रश्मि शुक्ला का राजनीतिक उपहार’ करार दिया है।