एक नई वैज्ञानिक खोज के अनुसार, लीवर की क्षति (जैसे हेपेटाइटिस, फैटी लीवर डिजीज, शराब से संबंधित क्षति या लिवर कैंसर) वाले व्यक्तियों में कम प्रोटीन वाला आहार लीवर ट्यूमर (लिवर कैंसर) की वृद्धि को धीमा कर सकता है और कैंसर से होने वाली मौतों को कम कर सकता है। यह अध्ययन अमेरिका की रटगर्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया है और इसे प्रतिष्ठित जर्नल Science Advances में प्रकाशित किया गया है।
स्वस्थ लीवर वाले लोग प्रोटीन के ब्रेकडाउन से उत्पन्न होने वाले विषाक्त अमोनिया को कुशलता से यूरिया में बदलकर शरीर से बाहर निकाल देते हैं। लेकिन लीवर की बीमारी या क्षति वाले लोगों में अमोनिया को साफ करने की क्षमता कम हो जाती है, जिससे अमोनिया का स्तर बढ़ जाता है। अध्ययन में पाया गया कि यह अतिरिक्त अमोनिया कैंसर कोशिकाओं के लिए पोषण का स्रोत बन जाता है और ट्यूमर की वृद्धि को बढ़ावा देता है।
शोधकर्ताओं ने चूहों पर प्रयोग किया, जिनमें लिवर कैंसर (हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा – HCC) का मॉडल बनाया गया था। कम प्रोटीन वाला आहार (कैलोरी का लगभग 6% प्रोटीन से) देने पर:
- ट्यूमर की वृद्धि काफी धीमी हुई
- खून और लीवर में अमोनिया का स्तर कम हुआ
- कैंसर से संबंधित मौतें काफी कम हुईं और चूहों की जीवन अवधि काफी बढ़ गई
सामान्य प्रोटीन वाले आहार वाले चूहों की तुलना में ये परिणाम बेहद प्रभावशाली थे।
अध्ययन के वरिष्ठ लेखक वेई-शिंग ज़ोंग (Wei-Xing Zong), जो रटगर्स अर्नेस्ट मारियो स्कूल ऑफ फार्मेसी में डिस्टिंग्विश्ड प्रोफेसर और रटगर्स कैंसर इंस्टीट्यूट के सदस्य हैं, ने कहा, “यदि आपके लीवर में कोई बीमारी या क्षति है जो इसे ठीक से काम करने से रोक रही है, तो आपको लिवर कैंसर का खतरा कम करने के लिए गंभीरता से प्रोटीन का सेवन कम करने पर विचार करना चाहिए।”
यह खोज लीवर कैंसर के जोखिम वाले मरीजों के लिए एक सरल आहार परिवर्तन के रूप में महत्वपूर्ण है, खासकर भारत जैसे देश में जहां हेपेटाइटिस, फैटी लीवर और अल्कोहल से संबंधित लीवर रोग आम हैं और लिवर कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। हालांकि, यह अध्ययन अभी चूहों पर आधारित है और मानव पर क्लिनिकल ट्रायल्स की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि लीवर रोगियों को डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह के बिना आहार में बड़े बदलाव नहीं करने चाहिए, क्योंकि प्रोटीन की कमी से कुपोषण का खतरा भी बढ़ सकता है।