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AC खरीदने से पहले जान लें ये 5 जरूरी बातें, वरना हर महीने झटका देगा बिजली का बिल

गर्मी का मौसम शुरू होते ही घरों में सबसे ज्यादा जिस चीज की चर्चा होती है, वह है एयर कंडीशनर। तापमान बढ़ते ही लोग राहत पाने के लिए एसी खरीदने की योजना बनाने लगते हैं। बाजार में इन दिनों अलग-अलग कंपनियों के कई मॉडल मौजूद हैं, जिनमें फीचर्स और कीमत दोनों अलग-अलग होते हैं। ऐसे में बिना सही जानकारी के एसी खरीद लेना कई बार बाद में परेशानी का कारण बन सकता है। कई लोग केवल कीमत या ऑफर देखकर एसी खरीद लेते हैं, लेकिन बाद में उन्हें बिजली के बढ़ते बिल, कम कूलिंग या ज्यादा मेंटेनेंस जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसलिए नया एसी खरीदने से पहले कुछ जरूरी बातों को समझ लेना बेहद जरूरी है।

सबसे पहले एसी की कूलिंग क्षमता यानी टन (Ton) का ध्यान रखना चाहिए। यह तय करता है कि एसी आपके कमरे को कितनी जल्दी और कितनी अच्छी तरह ठंडा कर पाएगा। अगर कमरे के हिसाब से कम टन वाला एसी लिया जाता है तो उसे लगातार चलना पड़ता है और फिर भी कूलिंग सही नहीं मिलती। वहीं जरूरत से ज्यादा टन वाला एसी लेने से बिजली की खपत बढ़ सकती है। आमतौर पर 120 वर्ग फीट तक के कमरे के लिए 1 टन एसी सही रहता है, जबकि 120 से 180 वर्ग फीट के कमरे के लिए 1.5 टन एसी बेहतर माना जाता है। इससे बड़े कमरों के लिए 2 टन एसी ज्यादा प्रभावी होता है।

एसी खरीदते समय उसकी स्टार रेटिंग भी जरूर देखनी चाहिए। यह रेटिंग बताती है कि एसी कितनी बिजली की खपत करेगा। ज्यादा स्टार रेटिंग वाले एसी शुरुआत में थोड़े महंगे हो सकते हैं, लेकिन लंबे समय में बिजली की बचत करवाते हैं। अगर एसी का इस्तेमाल रोजाना कई घंटों तक होना है, तो चार या पांच स्टार रेटिंग वाला एसी लेना ज्यादा बेहतर विकल्प माना जाता है।

आज के समय में इन्वर्टर एसी भी काफी लोकप्रिय हो चुके हैं। इन्वर्टर एसी में कंप्रेसर कमरे के तापमान के अनुसार अपनी स्पीड को एडजस्ट करता है, जिससे बिजली की खपत कम होती है और कूलिंग भी लगातार बनी रहती है। वहीं नॉन-इन्वर्टर एसी में कंप्रेसर बार-बार ऑन और ऑफ होता है, जिससे बिजली ज्यादा खर्च होती है और आवाज भी ज्यादा आती है।

इसके अलावा यह भी तय करना जरूरी है कि आपको विंडो एसी चाहिए या स्प्लिट एसी। विंडो एसी आमतौर पर सस्ते होते हैं और इन्हें लगाना भी आसान होता है, इसलिए छोटे कमरों या किराए के घरों के लिए यह अच्छा विकल्प हो सकते हैं। वहीं स्प्लिट एसी देखने में बेहतर होते हैं और इनमें आवाज भी कम आती है, लेकिन इन्हें लगाने के लिए प्रोफेशनल इंस्टॉलेशन की जरूरत पड़ती है।

एसी खरीदते समय इंस्टॉलेशन और मेंटेनेंस के खर्च को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। स्प्लिट एसी के साथ कॉपर पाइप, आउटडोर यूनिट, स्टैंड और इंस्टॉलेशन चार्ज जैसे अतिरिक्त खर्च जुड़ जाते हैं। समय-समय पर सर्विसिंग कराने से एसी की कूलिंग बेहतर रहती है और उसकी लाइफ भी लंबी हो जाती है।

news desk

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