नई दिल्ली: बॉलीवुड और साउथ फिल्म प्रेमियों के लिए 2 अक्टूबर 2025 का दिन बेहद खास रहा। ऋषभ शेट्टी की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘कांतारा: चैप्टर 1′ ने सिनेमाघरों में दस्तक देते ही बॉक्स ऑफिस पर धमाका कर दिया. पहले ही दिन एडवांस बुकिंग से फिल्म ने ₹30 करोड़ की कमाई दर्ज की, जिसमें कन्नड़ संस्करण ने सबसे बड़ी हिस्सेदारी बनाई, जबकि हिंदी संस्करण ने भी ₹3.7 करोड़ की एडवांस बुकिंग के साथ दर्शकों का दिल जीत लिया.
कांतारा: चैप्टर 1 – रोमांच और रहस्य की यात्रा
फिल्म की कहानी कदंब राजवंश के अत्याचारी शासक से शुरू होती है, जो हर चीज़ पर कब्जा जमाने की लालसा में जी रहा है. कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब शासक की नजर समुद्र किनारे मछली पकड़ रहे रहस्यमय बूढ़े व्यक्ति पर पड़ती है. क्या यह बूढ़ा सिर्फ़ मछुआरा है, या उसके पीछे छुपा है कोई बड़ा रहस्य? यही वह मोड़ है, जहां से शुरू होती है जंगल, शक्ति और संघर्ष से भरी रोमांचक यात्रा.
विजयेंद्र और कुलशेखर की सत्ता संघर्ष की कहानी
फिल्म में दशकों बाद विजयेंद्र (जयराम) और उनके परिवार की कहानी दिखाई गई है. उनका पुत्र कुलशेखर (गुलशन देवैया) नया राजा बनता है, जबकि कनकवती (रुक्मिणी वसंत) राजकोष संभालती हैं. कंतारा के नेता बर्मे (ऋषभ शेट्टी) अपने गांव और लोगों के लिए विकास और न्याय की राह चुनते हैं. जब ये दो राजवंश आमने-सामने आते हैं, तो जमीन, सत्ता और अधिकार को लेकर भयंकर संघर्ष शुरू हो जाता है.
अभिनय और तकनीकी उत्कृष्टता
ऋषभ शेट्टी ने बर्मे के किरदार में शानदार अभिनय किया है. रुक्मिणी वसंत ने कनकवती के रोल में फिल्म को मजबूती दी, जबकि जयराम और गुलशन देवैया ने अपने-अपने किरदारों में जान डाल दी. कुलशेखर के रूप में गुलशन देवैया की उपस्थिति स्क्रीन पर तनाव पैदा करती है.
तकनीकी पक्ष भी कमाल का है—अरविंद एस. कश्यप की छायांकन, अजनीश लोकनाथ का संगीत और विजुअल इफेक्ट्स फिल्म की कहानी को और प्रभावशाली बनाते हैं. प्रीक्वल में क्लाइमेक्स और गुलिगा सीन विशेष रूप से देखने लायक हैं.
दर्शकों की प्रतिक्रिया और सोशल मीडिया पर चर्चा
सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा गया. ट्विटर और इंस्टाग्राम पर दर्शकों ने इसे “ब्लॉकबस्टर” और “सिनेमाई अनुभव” बताया. कई यूज़र्स ने फिल्म के दूसरे भाग और क्लाइमेक्स को “गूसबम्प्स देने वाला” करार दिया.
कांतारा: चैप्टर 1 ने पहले ही दिन बॉक्स ऑफिस पर शानदार शुरुआत की है और समीक्षाएं भी सकारात्मक हैं. यदि यह ट्रेंड जारी रहता है, तो यह फिल्म भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक और मील का पत्थर साबित हो सकती है.