हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर की आखिरी महान हस्तियों में से एक, वेटरन एक्ट्रेस कामिनी कौशल का 98 वर्ष की आयु में निधन हो गया है. अपने अभिनय की शालीनता और गरिमा से दशकों तक दर्शकों के दिलों पर राज करने वाली एक्ट्रेस बॉलीवुड को अलविदा कर चुकी है. उनके परिवार ने इस दुखद घड़ी में शोक व्यक्त करते हुए प्रशंसकों से प्राइवेसी बनाए रखने की विनम्र अपील की है.
असली नाम उमा सूद, कामिनी कौशल ने सात दशकों से अधिक के अपने शानदार करियर में 90 से ज़्यादा फिल्मों में काम किया. वो सिर्फ एक एक्ट्रेस नहीं थीं, बल्कि हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर की यादों का एक जीता-जागता प्रतीक थीं.
एक ऐसा डेब्यू, जिसने इतिहास रचा
कामिनी कौशल ने 1946 में आई फिल्म ‘नीचा नगर’ से अपने करियर की शुरुआत की, और ये मात्र एक शुरुआत नहीं थी, बल्कि उनकी एक ऐतिहासिक जीत थी. ये फिल्म पहले कान फिल्म फेस्टिवल में ‘Palme d’Or’ (गोल्डन पाम) जीतने वाली अकेली भारतीय फिल्म बनकर अमर हो गई.
कामिनी कौशल 50 के दशक की सबसे चहेती और प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों में गिनी जाती थीं. दिलीप कुमार, राज कपूर और देव आनंद जैसे महानायकों के साथ उनकी ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री बेमिसाल थी.
उन्होंने राज कपूर की पहली फिल्म ‘जेल यात्रा’ (1947) और बाद में आरके फिल्म्स की पहली फिल्म ‘आग’ में काम किया था. दिलीप कुमार के साथ उनकी जोड़ी को सबसे सहज और बेहतरीन माना जाता था.
कम ही लोग जानते हैं कि सुपरस्टार धर्मेंद्र को उनकी डेब्यू फिल्म ‘शहीद’ (1965) में पहली को-स्टार के रूप में कामिनी कौशल मिली थीं.
मेन लीड से हटकर भी, उनका अभिनय हमेशा चमका
जैसे-जैसे समय बदला, कामिनी कौशल ने मुख्य नायिका की भूमिका छोड़ने के बाद भी, उन्होंने दमदार किरदार निभाना जारी रखा, जैसे ‘दो भाई’, ‘नदिया के पार’, ‘जिद्दी’, ‘शबनम’ और ‘बिराज बहू’. उनका अभिनय इतना गहरा था कि वह हर रोल में अपनी एक अलग छाप छोड़ जाती थीं.
‘लाल सिंह चड्ढा’ बनीं उनके सफर का आखिरी पड़ाव
कामिनी कौशल की सबसे खास बात ये रही कि वो पीढ़ी दर पीढ़ी सिनेमा से जुड़ी रहीं. अपने करियर के ढलान पर भी वो एक्टिव रहीं. जैसे 2013 में शाहरुख खान की ‘चेन्नई एक्सप्रेस में, 2019 में शाहिद कपूर की ‘कबीर सिंह’ और 2022 में आमिर खान की ‘लाल सिंह चड्ढा’ में उन्होंने अपनी अदाकारी से ये दिखाया कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती.
कामिनी कौशल का जाना भारतीय सिनेमा के एक गौरवशाली अध्याय का समापन है. उनकी विरासत, उनकी फिल्में और उनकी शालीनता हमेशा सिने प्रेमियों के दिलों में ज़िंदा रहेगी.