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ज्वाला गुट्टा ने डिलीवरी के बाद डोनेट किया 60 लीटर मां का दूध, बताया इसके पीछे का बेहद खास कारण

नई दिल्ली/हैदराबाद। भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी ज्वाला गुट्टा (Jwala Gutta) इन दिनों खेल के मैदान से दूर एक बेहद नेक काम को लेकर चर्चा में हैं।

ज्वाला गुट्टा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक बेहद भावुक और प्रेरणादायक पोस्ट शेयर की है। उन्होंने बताया कि मां बनने के अपने पहले साल (Postpartum Period) के दौरान उन्होंने पूरे 60 लीटर ब्रेस्ट मिल्क (मां का दूध) डोनेट किया है।

ज्वाला ने यह दूध चेन्नई और हैदराबाद के सरकारी अस्पतालों के नवजात शिशु वार्ड में भेजा है, ताकि समय से पहले जन्मे और गंभीर रूप से बीमार बच्चों की जान बचाई जा सके।

सिर्फ 100ml दूध से मिल सकता है दर्जनों बच्चों को जीवनदान

ज्वाला गुट्टा ने अपनी पोस्ट के जरिए लोगों को इस नेक काम के प्रति जागरूक भी किया। उन्होंने लिखा:

“सिर्फ 100 मिलीलीटर (ml) डोनर मिल्क से 1 किलोग्राम वजन वाले एक छोटे से बच्चे को कई दिनों तक जरूरी पोषण मिल सकता है। मेरे इस छोटे से प्रयास से एनआईसीयू (NICU) में भर्ती दर्जनों मासूम बच्चों को जीने का सहारा मिलेगा। मां का दूध दान करना पूरी तरह सुरक्षित है और आज के समय में इसकी बहुत ज्यादा जरूरत है।”

क्या होता है NICU और क्यों जरूरी है डोनर मिल्क?

अस्पताल का NICU (Neonatal Intensive Care Unit) वह वार्ड होता है, जहां समय से पहले पैदा हुए (प्रीमैच्योर), बेहद कम वजन वाले या गंभीर बीमारियों से जूझ रहे नवजात शिशुओं को आईसीयू सपोर्ट पर रखा जाता है।

कई बार गंभीर तनाव, सिजेरियन डिलीवरी, कुपोषण या बीमारी के कारण जन्म के तुरंत बाद मां का दूध नहीं उतर पाता। ऐसे नाजुक समय में दूसरी माताओं द्वारा डोनेट किया गया दूध (Donor Milk) इन बच्चों के लिए जीवन रक्षक दवा की तरह काम करता है। इससे बच्चों को न सिर्फ पोषण मिलता है, बल्कि जानलेवा पेट की बीमारी ‘नेक्रोटाइजिंग एंटरोकोलाइटिस’ (Necrotising Enterocolitis) का खतरा भी बहुत कम हो जाता है।

विज्ञान क्या कहता है? डोनर मिल्क के 3 बड़े फायदे

‘नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन’ (The BMJ) में प्रकाशित एक वैज्ञानिक रिसर्च के मुताबिक, डॉक्टरों की देखरेख में सुरक्षित (पाश्चुरीकृत) किया गया डोनर मिल्क शिशुओं के लिए अमृत समान है:

  • इन्फेक्शन (Sepsis) से बचाव: यदि प्रीमैच्योर बच्चे को शुरुआती 28 दिनों तक रोज उसके वजन के हिसाब से 10ml/kg डोनर मिल्क मिले, तो खून के जानलेवा इन्फेक्शन (सेप्सिस) का खतरा बेहद कम हो जाता है।
  • फेफड़ों की सुरक्षा: यह दूध समय से पहले जन्मे बच्चों को फेफड़ों की गंभीर बीमारी (ब्रोंकोपल्मोनरी डिस्प्लेजिया) से बचाता है।
  • वेंटिलेटर से जल्दी राहत: रिसर्च बताती है कि डिब्बे वाले दूध (Formula Milk) की तुलना में डोनर मिल्क पीने वाले बच्चे करीब 3 दिन पहले वेंटिलेटर सपोर्ट से बाहर आ जाते हैं।

भारत में कहां और कैसे कर सकते हैं ब्रेस्ट मिल्क डोनेट?

देश में ‘ह्यूमन मिल्क बैंक एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (Human Milk Bank Association of India) नाम का एक सुरक्षित सरकारी नेटवर्क काम कर रहा है। यह संस्था स्वस्थ और स्तनपान कराने वाली माताओं से स्वैच्छिक रूप से दूध इकट्ठा करती है। इसके बाद लैब में उसकी पूरी स्क्रीनिंग और जांच की जाती है, ताकि वह पूरी तरह सुरक्षित रहे। कोई भी इच्छुक महिला डॉक्टरी सलाह के बाद इन बैंकों के जरिए अपना योगदान दे सकती है।

FAQs: ब्रेस्ट मिल्क डोनेशन से जुड़े जरूरी सवाल-जवाब

  • Q1. ब्रेस्ट मिल्क डोनेशन (Breast Milk Donation) क्या है?
  • Ans. जब कोई स्तनपान कराने वाली मां अपनी मर्जी से अपने अतिरिक्त दूध को अस्पताल के मिल्क बैंक में जरूरतमंद और बीमार शिशुओं के लिए दान करती है, तो इसे ब्रेस्ट मिल्क डोनेशन कहते हैं।
  • Q2. क्या कोई भी महिला दूध दान कर सकती है?
  • Ans. नहीं, केवल वही स्वस्थ महिलाएं दूध दान कर सकती हैं, जो डॉक्टरों द्वारा किए गए बुनियादी स्वास्थ्य और ब्लड टेस्ट के मानकों पर पूरी तरह खरी उतरती हैं।
  • Q3. क्या यह दूध बच्चों के लिए सुरक्षित होता है?
  • Ans. जी हां, मिल्क बैंक में जमा करने से पहले दूध की पाश्चुरीकरण (Pasteurization) प्रक्रिया और बैक्टीरिया की गहन जांच की जाती है, जिससे यह पूरी तरह सुरक्षित हो जाता है।

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