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वेस्ट बैंक को लेकर इजरायल और UAE आए आमने सामने, ऐतिहासिक अकॉर्ड समझौते के टूटने का खतरा.

संयुक्त अरब अमीरात और इज़रायल के बीच हाल के वर्षों में बेहतर होते रिश्ते पर अब विराम लगता दिख रहा है. गाजा इजरायल संघर्ष के बीच पहली बार UAE ने नेतन्याहू सरकार के खिलाफ सख्त टिप्पणी की है. यह कदम अरब देशों से इजरायल के संबंधों में नए तनाव की शुरुआत माना जा रहा है. लंबे समय से चल रहे इज़रायल गाज़ा युद्ध पर चुप रहने के बाद अब संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE ने पहली बार इज़रायल को सख्त चेतावनी दी है. UAE ने कड़े शब्दों में कहा है कि अगर इज़रायल वेस्ट बैंक को अपने में विलय करने की कोशिश करता है, तो ‘यह बड़ी गलती होगी और सीमा पार हो जाएगी’.

इजरायल की ‘वेस्ट बैंक’ वाली योजना पर भड़का UAE

दरअसल हाल ही में ऑस्ट्रेलिया और कनाडा सहित यूरोप के कई देशों ने फिलिस्तीन को मान्यता देने का ऐलान किया था. जिसके जवाब में नेतन्याहू सरकार ने वेस्ट बैंक के बड़े हिस्से को इज़रायल में विलय करने की बात कही थी. इज़रायल के वित्त मंत्री बेजालेल स्मॉट्रिक ने प्रस्ताव रखते हुए कहा था कि इजरायल की ओर से 80 फीसदी वेस्ट बैंक का विलय किया जा सकता है. गौरतलब है कि 1967 की जंग में इज़रायल ने वेस्ट बैंक और पूर्वी येरुशलम का हिस्सा अपने नियंत्रण में ले लिया था, जहां आज लगभग 7 लाख यहूदी और 33 लाख फिलिस्तीनी रहते हैं.

इज़रायल की इस योजना पर UAE ने आपत्ति जताई है. UAE की वरिष्ठ प्रतिनिधि लाना नुसिबेह ने कहा है कि ‘वेस्ट बैंक का विलय संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के लिए एक रेड लाइन होगी. यह कदम अब्राहम समझौते की भावना और उसके उद्देश्य को गंभीर रूप से कमजोर करेगा, क्षेत्रीय एकता की दिशा को समाप्त कर देगा और इस संघर्ष के भविष्य को लेकर बनी व्यापक सहमति को बदल देगा. जिसका मक़सद दो स्वतंत्र राष्ट्रों के साथ-साथ शांति, समृद्धि और सुरक्षा के साथ रहना है.’ फिलिस्तीनी अथॉरिटी ने UAE के इस रुख का स्वागत किया है, हालांकि इज़रायल ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. लेकिन माना जा रहा है कि जल्द ही कोई हल नहीं निकला तो अकॉर्ड समझौते पर भी असर पड़ सकता है.

अब्राहम अकॉर्ड समझौते पर क्या पड़ेगा असर ?

2020 में अमेरिका की मध्यस्थता से हुआ अब्राहम अकॉर्ड एक ऐतिहासिक समझौता था, जिसके तहत संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन और बाद में मोरक्को जैसे अरब देशों ने पहली बार इज़रायल के साथ तनाव कम करते हुए, औपचारिक रूप से राजनयिक रिश्ते स्थापित किए थे.
इस समझौते का उद्देश्य अरब देशों और इज़रायल के बीच शांति, सहयोग और आर्थिक संबंध बढ़ाना था. इसे “अब्राहम” नाम इसलिए दिया गया क्योंकि यहूदियों, मुसलमानों और ईसाइयों के साझा पैगंबर अब्राहम को तीनों धर्मों में अहम माना जाता है.
इस अकॉर्ड ने दशकों पुराने टकराव के बीच एक नए सहयोग का रास्ता खोला. लेकिन अब इजरायल के रूख पर UAE की कड़ी चेतावनी एक बार फिर से अरब देशों और इजरायल के बीच के रिश्तों में तनाव लाने का संकेत मानी जा रही है.

news desk

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