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‘क्या चुनाव आयोग जान लेकर करा रहा है SIR?’ BLO रिंकू की मौत के बाद ममता ने उठाया सवाल

पश्चिम बंगाल में अगला विधानसभा चुनाव साल 2026 में होने वाला है. जिसे लेकर पश्चिम बंगाल में चल रहे मतदाता सूची ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न’ (SIR) कार्यक्रम के दौरान काम के बोझ और कथित दबाव से एक और बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) की मौत का मामला सामने आया है. नदिया ज़िले में BLO रिंकू तरफ़दार का अपने घर पर मृत पाया जाना, राज्य की सियासत में उबाल ला दिया है. रिंकू के परिवार ने साफ़ तौर पर ‘SIR काम के असहनीय तनाव’ को मौत का कारण बताया है.

BLOs की जान लेकर काम करा रहा है EC?

विपक्ष ने उठाए, सवाल ये घटना महज़ एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक संकट की ओर इशारा करती है. विपक्षी दलों और राजनीतिक जानकार ने सीधे तौर पर ये सवाल उठाना शुरू कर दिया है कि:
‘क्या भारत निर्वाचन आयोग (ECI) सिर्फ़ मतदाता सूची पुनरीक्षण का लक्ष्य पूरा करने के लिए BLOs की जान दाँव पर लगा रहा है? क्या ये प्रशासनिक लक्ष्य हासिल करने के लिए BLOs के जीवन का ‘खूनी खेल’ खेला जा रहा है?’
SIR से जुड़े तनाव के कारण बंगाल में अब तक 28 अन्य BLO अपनी जान गँवा चुके हैं, और अब ये आकड़ा 29 हो चुका है.
इस पूरी प्रक्रिया पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और विपक्ष ने गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका दावा है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की ये प्रक्रिया सत्तारूढ़ पार्टी के इशारे पर की जा रही है, जिसका उद्देश्य:
जानबूझकर और मनमाने ढंग से बड़ी संख्या में विकास-विरोधी मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं. इसके विपरीत, सत्ताधारी पार्टी के समर्थकों और कार्यकर्ताओं के नाम फ़र्ज़ी तरीके से सूची में जोड़े जा रहे हैं.

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने निर्वाचन आयोग (EC) पर अपना हमला तेज़ कर दिया है. उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को कड़ा पत्र लिखकर चल रहे इस ‘अनियोजित और ज़बरदस्ती वाले’ SIR अभियान को तुरंत रोकने की अपील की है.

बिहार चुनाव में भी दिखा था यही विवाद

ये प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद सिर्फ़ बंगाल तक सीमित नहीं है. चुनाव के दौरान मतदाता सूची में नाम हटाने और जोड़ने की ऐसी ही विवादित प्रक्रिया बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान भी देखी गई थी.

बिहार में भी विपक्ष ने मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर ख़ामियाँ और मनमानी का आरोप लगाया था. विवाद इतना बढ़ गया था कि मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया था, जिसने बाद में चुनाव आयोग को इस संबंध से जुडी हर जानकारी जारी करने पड़ी थी.
विश्लेषकों का मानना है कि BLOs की मौतों और मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपों ने बंगाल में चुनावी माहौल को और भी ज़्यादा तनावपूर्ण बना दिया है.

news desk

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