अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे तनाव में अब एक नया मोड़ आता नजर आ रहा है। अमेरिका और इजरायल ईरान पर बड़े हमले की तैयारी में हैं। इसको लेकर दोनों देशों ने अपनी रणनीति लगभग पूरी कर ली है और माना जा रहा है कि यह हमला अगले कुछ घंटों में हो सकता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायल का अगला हवाई हमला ईरान के ऊर्जा क्षेत्र पर केंद्रित हो सकता है। इस हमले में बिजली उत्पादन केंद्रों, ऊर्जा संयंत्रों और वितरण नेटवर्क को निशाना बनाए जाने की आशंका है।
इजरायल-ईरान युद्ध: नेतन्याहू का बड़ा दावा, ईरान का 70% स्टील उद्योग तबाह; अब बिजली ग्रिड निशाने पर
मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। शनिवार शाम को इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक वीडियो संदेश जारी कर ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियान की ताज़ा स्थिति साझा की। नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि इजरायली वायु सेना (IAF) अब केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि ईरान के सामान्य बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को भी निशाना बना रही है।
ईरान के स्टील और पेट्रोकेमिकल सेक्टर को भारी नुकसान
इजरायल के रणनीतिक हमलों ने ईरान की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। रिपोर्ट के अनुसार 70% स्टील उद्योग नष्ट: इजरायल का दावा है कि ईरान के स्टील उत्पादन का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा बर्बाद हो चुका है।
हथियार निर्माण पर चोट: इन उद्योगों को निशाना बनाने का मुख्य कारण यह है कि यहां उत्पादित स्टील का उपयोग मिसाइल और अन्य हथियार बनाने में किया जा रहा था।
पेट्रोकेमिकल प्लांट: स्टील के साथ-साथ पेट्रोकेमिकल संयंत्रों को भी निशाना बनाया गया है, क्योंकि इनके उप-उत्पादों का इस्तेमाल युद्ध सामग्री और आतंकी गतिविधियों के वित्तपोषण में होता है।
“इन उद्योगों का इस्तेमाल इजरायल और पूरी दुनिया के खिलाफ ‘आतंक’ फैलाने के लिए किया जा रहा है।” — बेंजामिन नेतन्याहू, प्रधानमंत्री, इजरायल
अगला लक्ष्य: ईरान का ऊर्जा और बिजली नेटवर्क
सुरक्षा अधिकारियों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, इजरायल इस हमले के अगले चरण (Next Phase) की तैयारी कर चुका है।
ऊर्जा क्षेत्र पर प्रहार: इजरायल अब ईरान के बिजली उत्पादन और वितरण नेटवर्क (Power Grids) को ठप करने की योजना बना रहा है।
डेडलाइन और टाइमिंग: यह हमला अगले कुछ दिनों में शुरू होने की संभावना है। इसे अमेरिकी 48 घंटे के अल्टीमेटम की समय सीमा को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।
उद्देश्य: ईरान की युद्ध क्षमता को पूरी तरह पंगु बनाना और उसके नागरिक व सैन्य संचालन को रोकना।
मामला यहीं खत्म नहीं होता, बल्कि यह हमला डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दिए गए 48 घंटे के अल्टीमेटम के तहत किया जा सकता है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की संभावना है।