मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच अमेरिका की ओर से ईरान पर लगातार हवाई हमलों की खबरें सामने आ रही हैं। अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई के बावजूद ईरान के तेवर नरम पड़ते नहीं दिख रहे हैं। वहां की सरकार के साथ बड़ी संख्या में लोग खड़े नजर आ रहे हैं और ईरानी सेना भी अमेरिका-इजरायल को जवाबी हमले कर रही है।
रिपोर्टों के मुताबिक ईरान की मिसाइलें कई बार अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना रही हैं, जबकि इजरायल की ओर दागी गई मिसाइलों से भी नुकसान की खबरें सामने आई हैं। हालांकि इजरायल में हुए नुकसान की तस्वीरें और वीडियो सीमित ही सामने आते हैं, क्योंकि सुरक्षा कारणों से वहां की सरकार ने कई मामलों में प्रसारण और सोशल मीडिया पर नियंत्रण लगा रखा है।
विश्लेषकों का कहना है कि ईरान के पास अमेरिका या इजरायल जैसी अत्याधुनिक बमबारी क्षमता भले न हो, लेकिन उसकी बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें दुश्मन के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं। इसी बीच ईरान की ओर से क्लस्टर हथियारों के इस्तेमाल को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
ईरान से जुड़े कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स और मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक वीडियो भी साझा किया गया है, जिसमें दावा किया गया है कि मिसाइल हमलों के साथ क्लस्टर बमों का इस्तेमाल किया जा रहा है और उनसे बड़े इलाके में तबाही मच रही है।
ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर क्लस्टर बम क्या होते हैं और इन्हें इतना खतरनाक क्यों माना जाता है।
क्या होते हैं क्लस्टर बम?
क्लस्टर बम एक तरह का हथियार होता है जिसमें एक बड़ा बम या मिसाइल (जिसे “पैरेंट म्यूनिशन” कहा जाता है) दागा जाता है। यह हवा में लगभग 7 से 10 किलोमीटर की ऊंचाई पर पहुंचकर फटता है और इसके अंदर मौजूद कई छोटे-छोटे बम, जिन्हें “सबम्यूनिशन” कहा जाता है, बाहर निकलकर बड़े इलाके में फैल जाते हैं।
इन छोटे बमों का असर सैकड़ों मीटर से लेकर कई किलोमीटर तक के क्षेत्र में पड़ सकता है। इसका मतलब यह है कि निशाना भले ही सटीक न हो, लेकिन तबाही का दायरा काफी बड़ा हो जाता है।
क्यों विवादों में रहते हैं क्लस्टर हथियार?
मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि क्लस्टर हथियार बिना भेदभाव के नुकसान पहुंचाते हैं। कई बार इनके छोटे बम तुरंत नहीं फटते और जमीन पर लंबे समय तक पड़े रहते हैं, जिससे बाद में भी आम लोगों के लिए खतरा बना रहता है।
अगर इन्हें घनी आबादी वाले इलाकों में इस्तेमाल किया जाए तो इसका खतरा और बढ़ जाता है। इजरायल में भी यही चिंता जताई जा रही है, क्योंकि कई मिसाइलें आबादी वाले क्षेत्रों की ओर दागे जाने का दावा किया गया है।
एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल के इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल सिक्योरिटी स्टडीज के सीनियर रिसर्चर येहोशुआ कालिस्की का कहना है कि क्लस्टर बम इमारतों को कम नुकसान पहुंचाते हैं, लेकिन इंसानों के लिए ज्यादा घातक साबित होते हैं।
क्यों माने जाते हैं खतरनाक?
क्लस्टर हथियारों की सबसे बड़ी आलोचना यह है कि ये लक्ष्य और आम लोगों के बीच अंतर नहीं कर पाते। कई बार इनके छोटे बम तुरंत नहीं फटते और जमीन पर लंबे समय तक पड़े रहते हैं। बाद में भी इनके फटने का खतरा बना रहता है, जिससे नागरिकों खासतौर पर बच्चों के लिए गंभीर जोखिम पैदा हो जाता है।
120 से ज्यादा देशों ने लगाया प्रतिबंध
क्लस्टर हथियारों के खतरे को देखते हुए 120 से अधिक देशों ने एक अंतरराष्ट्रीय संधि पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें इनके इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया गया है। हालांकि अमेरिका, इजरायल और ईरान उन देशों में शामिल हैं जिन्होंने इस समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।
क्लस्टर हथियार कई दशकों से अलग-अलग युद्धों में इस्तेमाल होते रहे हैं। साल 2006 में इजरायल ने भी लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ संघर्ष के दौरान ऐसे हथियारों का इस्तेमाल किया था। हिजबुल्लाह को ईरान का समर्थक माना जाता है।
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