ईरान ने इज़राइल के लिए जासूसी करने वाले को दी फांसी
ईरान ने इज़राइल के लिए जासूसी करने वाले बहमन चौबी-असल को फांसी दी, राष्ट्रीय सुरक्षा पर सख्त कार्रवाई
ईरान ने बहमन चौबी असल को फांसी दे दी गयी है.उस पर आरोप था कि वह इज़राइल की खुफिया एजेंसी मोसाद के लिए काम कर रहा था. ईरानी न्यायपालिका की आधिकारिक समाचार एजेंसी मिज़ान ने बताया कि चौबी-असल को “ईरान में इज़राइल के सबसे बड़े जासूसों में से एक” माना जाता था.
चौबी असल पर गंभीर आरोप थे कि उसने मोसाद के साथ मिलकर ईरानी सरकारी डेटाबेस तक गैरकानूनी पहुंच बनाई और डेटा केंद्रों में सेंधमारी की.इसके अलावा, वह ईरान में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के आयात के रास्तों की जानकारी भी इकट्ठा कर रहा था. इन सूचनाओं के जरिए वह इज़राइल को संवेदनशील डेटा पहुंचा रहा था, जिससे देश की सुरक्षा को बड़ा खतरा पैदा हुआ.
न्यायिक कार्रवाई और सजा
बहमन चौबी असल की अपील को ईरान की सर्वोच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया.अदालत ने उन्हें “देश में भ्रष्टाचार फैलाने” का दोषी पाया, जो ईरानी कानून के तहत एक गंभीर अपराध है और इसकी सजा फांसी है.न्यायपालिका ने साफ कर दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी किसी भी गतिविधि में शामिल लोगों को कोई छूट नहीं दी जाएगी.
यह मामला ईरान और इज़राइल के बीच वर्षों से चल रहे गुप्त संघर्ष का हिस्सा है, जो इस साल और तेज हो गया है. जून 2025 में इज़राइल ने ईरान के अंदर सीधे हमले किए थे, जिनमें मोसाद के एजेंटों की कथित भूमिका सामने आई.इसी साल अब तक कम से कम दस ईरानियों को इज़राइल के लिए जासूसी के आरोप में फांसी दी जा चुकी है.
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए कड़ा संदेश
ईरानी अधिकारियों ने इस फांसी को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति किसी भी प्रकार के समझौते से इन्कार करते हुए कड़ा संदेश बताया है.उनका कहना है कि देश की सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी.
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन इस सजा को राजनीतिक प्रतिशोध और न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता की कमी के रूप में देखते हैं. उनका कहना है कि आरोपियों को कई बार दबाव या यातना के तहत बयान देने को मजबूर किया जाता है. ऐसे मामलों में न्यायिक स्वतंत्रता पर सवाल उठते रहे हैं.
बहमन चौबी असल की फांसी से ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं करेगा और दुश्मनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करता रहेगा.यह घटना न केवल ईरान-इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाती है, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और खुफिया संघर्ष की गंभीरता को भी उजागर करती है.
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