ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच चुका है। आशंका जताई जा रही है कि अमेरिका किसी भी समय ईरान पर बड़ा सैन्य हमला कर सकता है, जिसके लिए वह अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देता नजर आ रहा है।
वहीं, ईरान ने भी दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका या इजरायल की ओर से उस पर किसी भी तरह का हमला किया गया, तो इसे पूरी तरह से युद्ध माना जाएगा और उसका करारा जवाब दिया जाएगा। ईरान का कहना है कि युद्ध की शुरुआत भले ही अमेरिका या इजरायल करें, लेकिन उसका अंत ईरान करेगा।
हालांकि, अमेरिका ईरान पर कार्रवाई के विकल्प पर विचार कर रहा है, लेकिन उसे ईरान के संभावित पलटवार का भी डर सता रहा है। खासतौर पर ईरानी मिसाइल हमलों को लेकर चिंता जताई जा रही है, जिनका असर अमेरिका के साथ-साथ इजरायल तक पर पड़ सकता है।
ईरान ने यह भी साफ किया है कि किसी हमले की स्थिति में वह अमेरिका के साथ-साथ इजरायल को भी निशाना बना सकता है। दूसरी ओर, संभावित अमेरिकी हमले की आशंका के बीच इजरायल पूरी तरह सतर्क मोड में है और अपनी सुरक्षा तैयारियों को मजबूत कर रहा है।इस बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि अमेरिका ईरान पर किन-किन ठिकानों को निशाना बना सकता है। इसे लेकर कयासों का दौर तेज है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने इजरायल समेत छह देशों के साथ एक गोपनीय सूची साझा की है, जिसमें संभावित हमले के ठिकानों का जिक्र किया गया है। इन रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि सूची में उन स्थानों की जानकारी है, जहां अमेरिका बमबारी कर सकता है।
अमेरिका ने ब्रिटेन, फ्रांस, इज़राइल और चार अरब देशों (संभावित रूप से UAE, जॉर्डन, सऊदी अरब और एक अन्य) के साथ मिलकर ईरान पर संभावित हमलों के लिए गुप्त टारगेट लिस्ट तैयार की है। इज़राइली अखबार ‘यिसराएल हायोम’ की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी टीम को निर्णायक सैन्य योजना बनाने के लिए निर्देश दिया है।
इस सीक्रेट लिस्ट में ईरान के महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया गया है। अमेरिका का कहना है कि इसका मकसद प्रदर्शनकारियों का समर्थन करना और ईरानी शासन को कमजोर करना है। हालांकि, कुछ अरब देशों जैसे सऊदी अरब, कतर, ओमान और मिस्र ने अमेरिका से इस कदम को टालने की अपील की है, क्योंकि उनका मानना है कि इससे क्षेत्रीय स्तर पर युद्ध जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
कहां-कहां हो सकता है हमला? संभावित टारगेट्स की लिस्ट
रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रस्तावित सीक्रेट लिस्ट में ईरान के कई अहम और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया है। इनमें मुख्य रूप से ये टारगेट्स शामिल हैं—
न्यूक्लियर साइट्स
ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी प्रमुख साइट्स—फोर्डो (Fordow), नटांज (Natanz) और इस्फाहान (Isfahan) को संभावित टारगेट माना जा रहा है। इन ठिकानों पर 2025 में भी हमले हो चुके हैं। हालांकि, पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन्हें पूरी तरह तबाह बताया था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसी (IAEA) का कहना है कि ईरान इन साइट्स को अपेक्षाकृत जल्दी दोबारा सक्रिय कर सकता है।
मिलिट्री कमांडर्स और लीडरशिप
लिस्ट में ईरान के शीर्ष सैन्य अधिकारी, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर्स और आंतरिक सुरक्षा बलों के वरिष्ठ नेता भी शामिल बताए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि इसका उद्देश्य विरोध प्रदर्शनों को दबाने वाली ताकतों को कमजोर करना है।
रणनीतिक सैन्य ठिकाने
इसके अलावा बैलिस्टिक मिसाइल फैक्ट्रियां, एयर डिफेंस सिस्टम और प्रमुख मिलिट्री बेस भी संभावित निशाने पर हैं। खास तौर पर उन मिसाइल क्षमताओं को खत्म करने पर जोर है, जिनसे अमेरिका के सहयोगी देशों को खतरा पहुंच सकता है।
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