नई दिल्ली: एशियाई खेल 2026 में भारतीय खिलाड़ियों ने व्यक्तिगत स्पर्धाओं से लेकर टीम मुकाबलों तक शानदार प्रदर्शन किया। भारत के पांच खिलाड़ियों ने एक ही एशियाई खेल में कम से कम तीन-तीन पदक जीतकर खास उपलब्धि हासिल की। इनमें कुमकुम मोहोद और नीरू ढांडा ने दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीता। वहीं विद्या रामराज, गुलवीर सिंह और रुद्रांक्ष पाटिल ने भी तीन-तीन पदक अपने नाम किए।
टीम स्पर्धाओं में भी भारत का दबदबा देखने को मिला। क्रिकेट, कबड्डी और हॉकी के महिला और पुरुष दोनों वर्गों में भारतीय टीमों ने स्वर्ण पदक जीतकर चैंपियन का खिताब हासिल किया। इस तरह इन तीनों खेलों की छह टीम स्पर्धाओं में भारत ने छह स्वर्ण पदक अपने नाम किए।
तीरंदाजी में कुमकुम मोहोद भारत की सबसे बड़ी पदक विजेताओं में शामिल रहीं। उन्होंने रिकर्व महिला व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद अंकिता भकत और कीर्ति के साथ रिकर्व महिला टीम स्पर्धा में भी स्वर्ण पदक हासिल किया।
कुमकुम ने धीरज बोम्मादेवरा के साथ रिकर्व मिश्रित टीम स्पर्धा में रजत पदक भी जीता। इस तरह उनके खाते में दो स्वर्ण और एक रजत पदक आया। उनकी उपलब्धि इसलिए भी खास रही क्योंकि वह एशियाई खेलों की व्यक्तिगत रिकर्व तीरंदाजी स्पर्धा में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।
निशानेबाजी में नीरू ढांडा ने भी दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर अपना अभियान यादगार बनाया। उन्होंने महिला ट्रैप व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक हासिल किया।
इसके बाद कायन चेनाई के साथ ट्रैप मिश्रित टीम स्पर्धा में भी नीरू ने स्वर्ण पदक जीता। महिला ट्रैप टीम स्पर्धा में मनीषा कीर और आशिमा अहलावत के साथ मिलकर उन्होंने रजत पदक अपने नाम किया।
रुद्रांक्ष पाटिल ने निशानेबाजी की तीन अलग-अलग स्पर्धाओं में पदक जीते। पुरुष 10 मीटर एयर राइफल व्यक्तिगत स्पर्धा में उन्होंने कांस्य पदक हासिल किया।
इसके अलावा हिमांशु ढिल्लों और पार्थ माने के साथ पुरुष 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में रजत पदक जीता। पुरुष 50 मीटर थ्री पोजिशंस टीम स्पर्धा में एपीएस तोमर और नीरज कुमार के साथ रुद्रांक्ष ने एक और रजत पदक अपने नाम किया।
रुद्रांक्ष पहले भी बड़ी उपलब्धि हासिल कर चुके हैं। वह महज 18 साल की उम्र में 2022 में विश्व चैंपियन बन चुके हैं।
एथलेटिक्स में गुलवीर सिंह ने तीन अलग-अलग दौड़ में पदक जीतकर शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने पुरुष 10 हजार मीटर दौड़ में रजत पदक हासिल किया। इसके बाद पुरुष 1500 मीटर में भी रजत पदक जीता।
गुलवीर ने पुरुष 5000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक अपने नाम किया। इस तरह उनके खाते में दो रजत और एक कांस्य पदक आया। एक ही एशियाई खेल में लंबी और मध्य दूरी की अलग-अलग स्पर्धाओं में पदक जीतना उनके अभियान की खास उपलब्धि रही।
विद्या रामराज ने तीन अलग-अलग रंग के पदक जीतकर अपनी खास पहचान बनाई। उन्होंने महिला 400 मीटर बाधा दौड़ में कांस्य पदक हासिल किया।
इसके बाद टीके विशाल, एमआर पूवम्मा और टीएस मनु के साथ मिश्रित 4×400 मीटर रिले में विद्या ने रजत पदक जीता। महिला 4×400 मीटर रिले में किरण, एम पूवम्मा और प्राची के साथ उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
इस तरह विद्या के खाते में एक स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य पदक रहा। पांचों भारतीय खिलाड़ियों में वह इकलौती खिलाड़ी रहीं, जिनके तीनों पदक अलग-अलग रंग के थे।
भारत का शानदार प्रदर्शन सिर्फ व्यक्तिगत स्पर्धाओं तक सीमित नहीं रहा। क्रिकेट में महिला और पुरुष दोनों भारतीय टीमों ने स्वर्ण पदक जीता। कबड्डी में भी महिला और पुरुष वर्ग में भारत ने शीर्ष स्थान हासिल किया।
हॉकी में भारतीय महिला और पुरुष टीमों ने भी स्वर्ण पदक जीतकर चैंपियन का खिताब अपने नाम किया। इसके साथ ही लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 का टिकट भी हासिल किया।
इस तरह क्रिकेट, कबड्डी और हॉकी की महिला और पुरुष टीमों ने मिलकर भारत के लिए छह स्वर्ण पदक जीते।
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