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ईरान-अमेरिका युद्ध के असर से निपटने की तैयारी? भारत ने बढ़ाया घरेलू LPG उत्पादन, 100% क्षमता पर काम कर रहीं हैं रिफाइनरियां

ईरान-अमेरिका तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ती हलचल के बीच भारत में रसोई गैस की सप्लाई को लेकर चिंता जरूर बढ़ी थी, लेकिन अब केंद्र सरकार ने तेजी से कदम उठाकर हालात को संभालने की कोशिश की है। पेट्रोलियम मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक सरकारी निर्देशों के बाद देश की तेल रिफाइनरियों ने एलपीजी उत्पादन में करीब 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है। इससे घरेलू गैस की संभावित कमी का खतरा काफी हद तक कम होने की उम्मीद है।

सूत्रों का कहना है कि इस समय देश की सभी सरकारी और निजी रिफाइनरियां पूरी क्षमता यानी 100% पर काम कर रही हैं। सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मिले विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए रिफाइनरियों को निर्देश दिया कि वे प्रोपेन और ब्यूटेन स्ट्रीम्स का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल एलपीजी बनाने में करें। जो अतिरिक्त एलपीजी तैयार हो रही है, उसे प्राथमिकता के आधार पर घरेलू सिलेंडरों के लिए तेल कंपनियों को दिया जा रहा है।

सरकार का कहना है कि कुछ दिन पहले बाजार में गैस की कमी को लेकर अफवाहें फैल गई थीं, लेकिन अब स्थिति नियंत्रण में है। हर गैस डिपो पर पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और सप्लाई भी सामान्य हो रही है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि घबराकर अतिरिक्त सिलेंडर खरीदने की जरूरत नहीं है, क्योंकि व्यवस्था लगातार मॉनिटर की जा रही है।

क्यों बढ़ी थी चिंता

दरअसल भारत दुनिया के सबसे बड़े एलपीजी उपभोक्ताओं में से एक है। देश में हर साल करीब 33 मिलियन टन एलपीजी की खपत होती है। इसमें से लगभग 60 से 65 प्रतिशत गैस मध्य पूर्व से आयात होती है और उसका बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता है।

हाल के दिनों में ईरान-अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव की वजह से इस समुद्री रास्ते पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने की खबरें आईं। इससे आयात पर असर पड़ने की आशंका जताई जाने लगी। भारत में घरेलू उत्पादन पहले से ही सीमित है और कुल मांग का लगभग 40 प्रतिशत ही देश में बन पाता है। ऐसे में सरकार ने रिफाइनरियों की अतिरिक्त क्षमता का इस्तेमाल कर उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया।

कीमतों और सप्लाई पर नजर

हाल ही में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में करीब ₹60 की बढ़ोतरी हुई थी और दिल्ली में 14.2 किलो का सिलेंडर अब लगभग ₹913 का हो गया है। हालांकि सरकार का कहना है कि इस बढ़ोतरी का मौजूदा अंतरराष्ट्रीय तनाव से सीधा संबंध नहीं है।

सरकार ने सप्लाई की निगरानी के लिए एक हाई-लेवल कमेटी भी बनाई है, जिसमें तीनों सरकारी तेल कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। यह कमेटी लगातार स्थिति की समीक्षा करेगी ताकि कहीं भी गैस की कमी न हो। होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक उपभोक्ताओं को भी सप्लाई दी जाएगी, लेकिन प्राथमिकता घरेलू उपभोक्ताओं को ही मिलेगी।

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। हालांकि अगर अंतरराष्ट्रीय तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो आयात पर निर्भरता फिर भी चुनौती बन सकती है। फिलहाल सरकार का कहना है कि हालात नियंत्रण में हैं और लोगों को सामान्य तरीके से गैस का उपयोग करते रहना चाहिए।

news desk

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