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2 अरब लोगों का बाजार बनाने वाली भारत-यूरोपीय संघ की ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ आखिरी दौर में, जल्द हो सकता है एग्रीमेंट

भारत और यूरोपीय संघ के बीच जिस मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का लंबे समय से इंतजार किया जा रहा था, वह अब अपने आख़िरी पड़ाव पर पहुंचता दिख रहा है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के मुताबिक, इस महीने के भीतर इस डील पर बातचीत पूरी होने की उम्मीद है। अगर सब कुछ तय समय पर हुआ, तो यह भारत के लिए अब तक का सबसे बड़ा ट्रेड एग्रीमेंट होगा। खास बात यह है कि अमेरिका के टैरिफ दबाव के बीच भारत नए बाजार तलाश रहा है और यूरोपीय संघ इस लिहाज से काफी अहम बन गया है।

सालों पुरानी बातचीत, अब नतीजे के करीब

यह समझौता कोई नया आइडिया नहीं है, बल्कि सालों से दोनों पक्षों के बीच चर्चा का विषय रहा है। मकसद साफ है—आर्थिक रिश्तों को और मजबूत करना और चीन व रूस पर निर्भरता कम करना। 2024 में भारत और यूरोपीय संघ के बीच 120 अरब यूरो का द्विपक्षीय व्यापार हुआ, जिसके बाद यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर बन गया। अग्रवाल का कहना है कि दोनों पक्ष “बहुत करीब” पहुंच चुके हैं और कोशिश है कि इस महीने के आखिर में होने वाली भारत-ईयू शिखर बैठक से पहले समझौता फाइनल हो जाए।

‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ और बड़ा बाजार

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने डावोस में इस डील को “मदर ऑफ ऑल डील्स” कहा है। उनके मुताबिक, यह समझौता करीब 2 अरब लोगों का संयुक्त बाजार बनाएगा और वैश्विक जीडीपी के लगभग एक चौथाई हिस्से को कवर करेगा। इसी सिलसिले में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और वॉन डेर लेयेन 25 से 27 जनवरी तक भारत दौरे पर रहेंगे। वे गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि होंगे और 27 जनवरी को होने वाले भारत-ईयू शिखर सम्मेलन में इस डील की औपचारिक घोषणा हो सकती है।

इस समझौते से भारत अपने बड़े और अब तक काफी हद तक संरक्षित बाजार को यूरोपीय उत्पादों के लिए खोलेगा, वहीं यूरोपीय संघ को भारत में ऑटोमोबाइल, वाइन और दूसरे सामानों की आसान पहुंच मिलेगी। जानकार मानते हैं कि मौजूदा दौर में, जब दुनिया भर में संरक्षणवाद बढ़ रहा है और सप्लाई चेन को लेकर जोखिम बने हुए हैं, यह डील रणनीतिक तौर पर काफी अहम साबित हो सकती है। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, 24 में से 20 अध्यायों पर सहमति बन चुकी है और बाकी मुद्दों पर रोजाना बातचीत चल रही है। कुल मिलाकर, यह समझौता ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत को नई ताकत देने के साथ-साथ निवेश और तकनीक के रास्ते भी खोलेगा।

news desk

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