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भारत–ईयू एफटीए अंतिम मोड़ पर, यूरोपीय कारें सस्ती होंगी? टैरिफ कटौती से टेस्ला तक को फायदा संभव

नई दिल्ली: भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) अब अपने अंतिम चरण में पहुंचता नजर आ रहा है। इसी कड़ी में भारत ने एक बड़ा कदम उठाते हुए यूरोपीय कारों पर आयात शुल्क को मौजूदा 110 फीसदी से घटाकर 40 फीसदी तक करने का प्रस्ताव रखा है। सूत्रों के मुताबिक, यह कटौती शुरुआती तौर पर करीब 2 लाख कंबस्टन-इंजन (पेट्रोल-डीजल) कारों पर लागू होगी, जबकि 15,000 यूरो से अधिक कीमत वाली इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) पर इससे भी कम शुल्क तय किया जा सकता है।

यह अहम घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन भारत दौरे पर हैं और गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। इस दौरान उन्होंने भारत की भूमिका की जमकर सराहना करते हुए कहा कि “एक सफल भारत पूरी दुनिया को ज्यादा स्थिर बनाता है।” उन्होंने भारत–ईयू रिश्तों को आज की “टूटती हुई दुनिया” के लिए एक वैकल्पिक और सकारात्मक रास्ता बताया।

“मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील्स” की ओर भारत–ईयू

उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने प्रस्तावित भारत–ईयू व्यापार समझौते को “मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील्स” करार देते हुए कहा कि यह दोनों पक्षों के लिए ऐतिहासिक साबित हो सकता है। उनका कहना है कि मौजूदा वैश्विक माहौल—जहां युद्ध, संरक्षणवाद और राजनीतिक अस्थिरता हावी है—उसमें भारत और यूरोपीय संघ की साझेदारी सहयोग और भरोसे की नई मिसाल पेश कर रही है।

सूत्रों के अनुसार, भारत और ईयू के बीच एफटीए पर बातचीत मंगलवार को समाप्त होने की उम्मीद है। इस समझौते में व्यापार के साथ-साथ सुरक्षा, रक्षा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी जैसे मुद्दों पर भी खास फोकस रहेगा।

टैरिफ कटौती की शर्तें और संभावित फायदे

भारत द्वारा कारों पर टैरिफ में प्रस्तावित कटौती पूरी तरह बिना शर्त नहीं होगी। सरकार आयातित कारों की संख्या सीमित रखने और घरेलू ऑटो उद्योग के हितों की सुरक्षा जैसे प्रावधानों पर जोर दे रही है। माना जा रहा है कि इस फैसले से टेस्ला समेत कई यूरोपीय ऑटो ब्रांड्स के लिए भारतीय बाजार में एंट्री आसान हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से उपभोक्ताओं को फायदा होगा, क्योंकि यूरोपीय कारें और वाइन जैसे उत्पाद सस्ते हो सकते हैं। हालांकि, घरेलू ऑटो सेक्टर के लिए प्रतिस्पर्धा जरूर बढ़ेगी, जिसे संतुलित करने के लिए सरकार अतिरिक्त उपाय कर सकती है।

व्यापार से आगे रणनीतिक साझेदारी

यह समझौता सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा। समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद विरोध, सप्लाई चेन और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में भी भारत और ईयू के बीच सहयोग मजबूत होने की उम्मीद है। इसके साथ ही भारत, एशिया में ईयू का तीसरा प्रमुख रणनीतिक साझेदार बन जाएगा—जापान और दक्षिण कोरिया के बाद।

ईयू परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा भी भारत दौरे पर हैं और गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल हो रहे हैं। इस मौके पर उर्सुला वॉन डेर लेयेन का सिल्क ब्रोकेड परिधान भी चर्चा में रहा, जिसने कूटनीति के साथ फैशन का दिलचस्प मेल पेश किया।

कुल मिलाकर, भारत–ईयू एफटीए दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है। वैश्विक चुनौतियों के बीच यह समझौता सहयोग और स्थिरता का नया उदाहरण पेश करेगा। अब सभी की नजरें मंगलवार को होने वाली संभावित आधिकारिक घोषणाओं पर टिकी हैं।

news desk

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