इस्लामाबाद: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के संस्थापक इमरान खान की मौत की अफवाहें सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही हैं, लेकिन ये दावे अभी तक बिना पुष्टि के हैं. पाकिस्तान और अफगानिस्तान के कुछ मीडिया आउटलेट ने दावा किया है कि इमरान खान को रावलपिंडी के अडियाला जेल में “रहस्यमय ढंग से मार दिया गया” है. यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल होते ही पीटीआई समर्थकों में आक्रोश फैल गया, जिसके चलते जेल के बाहर हजारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए. हालांकि, पाकिस्तानी सरकार ने इन दावों को “फर्जी” बताते हुए खारिज कर दिया है, और इमरान के परिवार ने भी कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है.
सोशल मीडिया पर #ImranKhan हुआ ट्रेंड, फेक वीडियो वायरल
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर #ImranKhan हैशटैग ट्रेंड कर रहा है, जहां यूजर्स ने दावा किया कि इमरान को सेना प्रमुख आसिम मुनीर और आईएसआई (इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस) ने हिरासत में मार डाला. कुछ यूजर्स ने एक वीडियो शेयर किया, जिसमें इमरान को स्ट्रेचर पर ले जाते दिखाया गया, लेकिन यह वीडियो जाली साबित हुआ. यह पहली बार नहीं है जब इमरान की मौत की ऐसी अफवाहें फैलाई गईं. मई 2025 में भी एक फर्जी प्रेस रिलीज वायरल हुई थी, जिसमें पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय का नाम लिया गया था. सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने तब इसे “फर्जी” बताते हुए जनता से अपील की थी कि ऐसी झूठी खबरों पर विश्वास न करें. वर्तमान अफवाहें भी उसी पैटर्न पर आधारित लग रही हैं, खासकर जब पीटीआई समर्थक जेल के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं.
परिवार पर पुलिस का अत्याचार
कुछ ख़बरों के अनुसार इमरान की बहनों—नूरीन नियाज़ी, अलीमा खान और डॉ. उज़मा खान—ने मंगलवार को जेल पहुंचकर मिलने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें “क्रूरता से पीटा” और घसीटा. पीटीआई ने इसे “राजनीतिक साजिश” करार दिया और चीफ जस्टिस से स्वत: संज्ञान लेने की अपील की. पार्टी का कहना है कि इमरान को “आतंकवादियों के लिए बनी डेथ सेल” में रखा गया है, जो उनकी सेहत के लिए खतरा है. पाकिस्तान सरकार ने एक महीने से अधिक समय से इमरान से मुलाकातों पर अनौपचारिक प्रतिबंध लगा रखा है. पीटीआई के अनुसार, यह “साइलेंट कूप” का हिस्सा है, जहां सेना और सरकार मिलकर इमरान को अलग-थलग करने की कोशिश कर रही है. इमरान की पत्नी बुशरा बीबी ने समर्थकों से “शांतिपूर्ण विरोध” जारी रखने की अपील की है.
ये अफवाहें पिछले साल 26 नवंबर 2024 को हुए पीटीआई के बड़े जलसे की याद दिला रही हैं, जब इस्लामाबाद में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुई थीं. उस दिन छह लोग मारे गए थे, और सरकार ने रैली पर सख्ती बरतते हुए इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी थीं. पाकिस्तान से मिल रही जानकारी के मुताबिक, हुक्मरान उस तरह का हंगामा दोबारा नहीं चाहते. लिहाजा इमरान खान को कई हफ्तों से परिजनों से भी नहीं मिलने दिया गया है, ताकि वे किसी तरह इमरान का कोई संदेश जारी न कर सकें. उम्मीद जताई जा रही है कि नवंबर माह नहीं तो दिसंबर से उनको परिजनों से फिर मिलने दिया जाएगा.
पीटीआई ने “शहीदों” की याद में पेशावर में सभा बुलाई है. यह घटना पाकिस्तान की उथल-पुथल वाली राजनीति को उजागर करती है, जहां सेना का दखल और विपक्षी दमन आम है. अधिक अपडेट के लिए आधिकारिक स्रोतों का इंतजार करें.