नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ जारी जंग से बाहर निकलने का रास्ता तलाश रहे हैं। विवाद को सुलझाना लगातार कठिन होता जा रहा है, ऐसे में अमेरिकी प्रशासन अब ऐसा रास्ता खोज रहा है जिससे बिना किसी औपचारिक परमाणु समझौते के भी संघर्ष से पीछे हटने का आधार तैयार किया जा सके।
अमेरिकी अखबार ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगर ईरान होर्मुज जलमार्ग को पूरी तरह से दोबारा खोल देता है, तो ट्रंप प्रशासन परमाणु मुद्दे को फिलहाल किनारे रखकर इसे अपनी जीत के तौर पर पेश कर सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप कई हफ्तों से संभावित समाधान की तैयारी में जुटे हैं। उन्होंने अपने वरिष्ठ सहयोगियों से निजी बातचीत में संकेत दिया है कि अमेरिका ईरान के साथ औपचारिक परमाणु समझौता किए बिना भी संघर्ष से पीछे हट सकता है।
ऐसे में होर्मुज जलमार्ग का पूरी तरह खुलना अमेरिका के लिए एक संभावित रास्ता बन सकता है। इससे ट्रंप प्रशासन सैन्य अभियान के बाद किसी समझौते या परमाणु करार के बजाय जलमार्ग को फिर से खुलवाने को अपनी उपलब्धि के रूप में पेश कर सकता है।
हालांकि, होर्मुज जलमार्ग से आवाजाही बहाल करने के लिए ईरान ने कई बड़ी मांगें रखी हैं। ईरान अमेरिका से अरबों डॉलर के भुगतान, अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी खत्म करने और क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य बलों की पूरी तरह वापसी समेत कई रियायतें चाहता है।
इन शर्तों ने अमेरिका के कूटनीतिक विकल्पों को सीमित कर दिया है। इसके साथ ही यह आशंका भी बढ़ रही है कि ईरान किसी तत्काल समझौते के बजाय लंबे समय तक टकराव जारी रखने की तैयारी कर रहा है।
मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए होर्मुज जलमार्ग में आवाजाही बाधित करने की ईरान की क्षमता ने उसे रणनीतिक बढ़त दी है। इस संकरे समुद्री रास्ते में पैदा हुई बाधाओं का असर वैश्विक वाणिज्यिक जहाजरानी पर पड़ा है और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भी अस्थिरता बढ़ी है।
ट्रंप हाल के दिनों में कई बार दावा कर चुके हैं कि होर्मुज पूरी तरह खुला है, लेकिन ये दावे जल्दबाजी में किए गए साबित हुए हैं। फरवरी में तनाव बढ़ने के बाद ईरान ने इस अहम समुद्री मार्ग को बंद कर दिया था।
ईरान का कहना था कि अमेरिकी युद्धपोतों और उसके सहयोगी देशों के जहाजों को इस रास्ते से गुजरने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। इसके अलावा ईरान ने वाणिज्यिक जहाजों से टोल वसूलने की कोशिश भी की थी।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान की ओर से जहाजों पर लगाए गए प्रतिबंधों और टोल वसूलने की किसी भी कोशिश को सख्ती से खारिज किया है। इसी सप्ताह संयुक्त अरब अमीरात ने दावा किया कि ईरान ने उसके एक जहाज पर मिसाइल हमला किया है। इस घटनाक्रम के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक समाधान की उम्मीदों को और झटका लगा है।
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहम्मद बाघेरे जोलघाद्र ने होर्मुज जलमार्ग को दोबारा खोलने के लिए कई शर्तें सामने रखी हैं।
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक, जोलघाद्र ने कहा कि अमेरिका को युद्ध हमेशा के लिए खत्म करना होगा और अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटानी होगी। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिकी सैन्य बलों की वापसी, सभी प्रतिबंधों को हटाने और ईरान की जब्त वित्तीय संपत्तियों को जारी करने की मांग की है।
उन्होंने युद्ध के नुकसान की भरपाई किए जाने की भी मांग रखी। इसके अलावा अमेरिका से धमकियां और अपमानजनक बयान बंद करने तथा पूरे क्षेत्र में ईरान के सहयोगी मिलिशिया के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई पूरी तरह रोकने की मांग भी की गई है।
अमेरिका में होने वाले मिड टर्म चुनावों से पहले घरेलू राजनीतिक परिस्थितियां भी ट्रंप प्रशासन पर किसी समाधान तक पहुंचने का दबाव बढ़ा रही हैं। युद्ध शुरू होने से पहले के मुकाबले अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें अभी भी ऊंची हैं।
ऐसे में ट्रंप प्रशासन ऐसा रास्ता तलाश रहा है, जिसे अमेरिकी मतदाताओं के सामने सैन्य अभियान की सफलता के तौर पर पेश किया जा सके। रिपोर्ट के मुताबिक, होर्मुज जलमार्ग का पूरी तरह खुलना इसी रणनीति का हिस्सा बन सकता है। इससे ट्रंप परमाणु मुद्दे पर औपचारिक समझौते के बिना भी ईरान के खिलाफ अभियान से पीछे हटने को अपनी जीत के रूप में प्रस्तुत कर सकते हैं।
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