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तिब्बत: 4,900 मीटर की ऊंचाई पर कैसे फंसे भारत समेत कई देशों के हजारों पर्वतारोही? अक्तूबर में आया एवरेस्ट पर ‘मौत का तूफान’!

तिब्बत के माउंट एवरेस्ट के सुदूर पूर्वी क्षेत्र में आए भीषण बर्फीले तूफान ने हज़ार से अधिक पर्वतारोहियों की जान पर संकट खड़ा कर दिया है. 4,900 मीटर की ऊंचाई पर बसे शिविरों में यह सभी पर्वतारोही फंसे हुए हैं. लगातार बर्फबारी और तूफ़ानी हवाओं की वजह से हालात और मुश्किल हो गए हैं.

खबरों के मुताबिक तिब्बत के माउंट एवरेस्ट के पूर्वी हिस्से में शुक्रवार शाम से शुरू हुई बर्फबारी ने अचानक तूफानी रूप ले लिया. क्योंकि इस क्षेत्र में पर्वतारोहियों और ट्रेकिंग करने वालों की भारी संख्या आती है, इसलिए इस तूफान में बड़ी संख्या में लोग फंस हुए हैं. विशेषज्ञों और गाइड्स का कहना है कि अक्टूबर के महीने में इस तरह का बर्फीला तूफान अप्रत्याशित था, इस मौसम में इतनी गंभीर बर्फबारी पहले कभी नहीं देखी गई.

शिविरों में फंसे हुए हैं पर्वतारोही

बताया जा रहा है कि फंसे हुए पर्वतारोहियों में भारत के अलावा चीन, नेपाल और कुछ यूरोपीय देशों के लोग भी शामिल हैं. इसलिए दूतावास स्तर पर लगातार संपर्क साधा जा रहा है ताकि सभी को सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया तेज की जा सके. सूत्रों ने बताया कि कुछ पर्वतारोही लगभग 24 घंटे से अधिक समय से शिविरों में फंसे हुए हैं. हालात को देखते हुए राहत सामग्री, ऑक्सीजन सिलेंडर और दवाइयां भी वहां पहुंचाई जा रही हैं.

बचाव कार्य में सेना और स्थानीय दल सक्रिय

जानकारी के अनुसार, अब तक करीब 350 ट्रेकर सुरक्षित रूप से कुदांग शिविर तक पहुंच चुके हैं, जबकि लगभग 200 लोगों से संपर्क स्थापित कर लिया गया है. विभिन्न बचाव दलों के साथ-साथ स्थानीय लोग भी इस आपदा में मदद के लिए जुट गए हैं. विशेष मशीनों से बर्फ हटाने और रास्ता साफ़ करने का काम चल रहा है. अब तक कई पर्वतारोहियों को सुरक्षित निकाल लिया गया है, लेकिन ऊंचाई पर लगातार गिरती बर्फ और ठंडी हवाओं के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में दिक्कतें आ रही हैं.

प्रशासन ने जारी किया अलर्ट

तिब्बत प्रशासन ने इस क्षेत्र में आगे पर्वतारोहण और ट्रेकिंग गतिविधियों पर फिलहाल रोक लगा दी है. मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि आने वाले दो दिनों तक ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी और तेज हवाएं जारी रह सकती हैं. प्रशासन का कहना है कि रेस्क्यू ऑपरेशन को प्राथमिकता दी जा रही है और हर संभव प्रयास किया जा रहा है कि सभी पर्वतारोही सुरक्षित वापस लौटें. हालांकि, इलाके की कठिन भौगोलिक परिस्थितियां और खराब मौसम इस अभियान को चुनौतीपूर्ण बना रहे हैं.

news desk

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