नई दिल्ली: समुद्र में उठने वाला चक्रवाती तूफान तबाही मचा सकता है, लेकिन उसका नाम सुनकर शायद आपको किसी खूबसूरत फूल का ख्याल आए। ऐसा ही नाम है ‘चांपी’ (Champi), जो लाओस की भाषा और वहां पाए जाने वाले सुगंधित फूल से जुड़ा है। दिलचस्प बात यह है कि इस तूफान का नाम जापान ने नहीं, बल्कि लाओस ने सुझाया है। जापान की भूमिका भी अहम है, क्योंकि पश्चिमी उत्तरी प्रशांत महासागर और दक्षिण चीन सागर में उठने वाले तूफानों को आधिकारिक नाम देने की जिम्मेदारी इसी क्षेत्र की नामकरण व्यवस्था के तहत जापान की मौसम एजेंसी निभाती है। आखिर एक खतरनाक तूफान को फूल जैसा नाम क्यों दिया गया और इसके पीछे कौन-सा सिस्टम काम करता है?
‘चांपी’ का अंग्रेजी नाम Champi है। हांगकांग ऑब्जर्वेटरी की नामों और उनके अर्थ से जुड़ी सूची के मुताबिक, यह नाम मीठी खुशबू वाले फूल से संबंधित है, जिसकी बनावट मोम जैसी बताई जाती है। इस नाम का संबंध लाओस से है और इसे पश्चिमी उत्तरी प्रशांत महासागर तथा दक्षिण चीन सागर में आने वाले उष्णकटिबंधीय तूफानों के लिए प्रस्तावित नामों की सूची में शामिल किया गया है।
हालांकि, किसी तूफान का नाम फूल, जानवर या किसी सांस्कृतिक प्रतीक पर रखे जाने का मतलब यह नहीं है कि उसका उस चीज से कोई वैज्ञानिक संबंध है। नाम का मुख्य उद्देश्य तूफान की पहचान आसान बनाना और मौसम संबंधी चेतावनियों को लोगों तक स्पष्ट रूप से पहुंचाना है।
इस सवाल का जवाब दोनों देशों की अलग-अलग भूमिकाओं में छिपा है। चांपी नाम लाओस ने सुझाया था, जबकि जापान इस क्षेत्र में तूफानों को आधिकारिक नाम देने की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाता है।
पश्चिमी उत्तरी प्रशांत महासागर और दक्षिण चीन सागर के लिए तूफानों के नाम तय करने की व्यवस्था विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और संयुक्त राष्ट्र के एशिया-प्रशांत आर्थिक एवं सामाजिक आयोग (ESCAP) से जुड़ी टाइफून समिति के तहत संचालित होती है।
इस समिति में 14 सदस्य देश और क्षेत्र शामिल हैं। सभी अपनी ओर से नाम सुझाते हैं और स्वीकृत नामों की सूची तैयार की जाती है। इसके बाद जापान मौसम विज्ञान एजेंसी का टोक्यो स्थित क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र सूची के अनुसार तूफानों को नाम देता है। यानी जापान नामकरण प्रक्रिया का अहम हिस्सा है, लेकिन हर नाम उसी की ओर से प्रस्तावित नहीं किया जाता।
पहले तूफानों की पहचान के लिए उनकी भौगोलिक स्थिति और मौसम संबंधी तकनीकी विवरणों का सहारा लिया जाता था। लेकिन जब एक ही क्षेत्र में कई तूफान सक्रिय हों, तो केवल तकनीकी जानकारी के आधार पर आम लोगों, मीडिया, मौसम वैज्ञानिकों और राहत एजेंसियों के लिए उनके बारे में बातचीत करना मुश्किल हो सकता है।
इसी समस्या को आसान बनाने के लिए तूफानों को छोटे और अलग-अलग नाम दिए जाते हैं। इससे मौसम विभाग चेतावनी जारी करते समय किसी खास तूफान की पहचान आसानी से कर सकता है। लोगों को भी यह समझने में मदद मिलती है कि चेतावनी किस तूफान से संबंधित है।
नामकरण का एक फायदा यह भी है कि पुराने तूफानों का रिकॉर्ड रखना और उनके प्रभाव का अध्ययन करना आसान हो जाता है।
पश्चिमी उत्तरी प्रशांत महासागर और दक्षिण चीन सागर के लिए नामकरण व्यवस्था में 14 सदस्य देश और क्षेत्र शामिल हैं। इनमें कंबोडिया, चीन, उत्तर कोरिया, हांगकांग, जापान, लाओस, मकाऊ, मलेशिया, माइक्रोनेशिया, फिलीपींस, दक्षिण कोरिया, थाईलैंड, अमेरिका और वियतनाम शामिल हैं।
इनके सुझाए नामों की स्वीकृत सूची से ही तूफानों को नाम दिया जाता है। इसलिए किसी तूफान का नाम किसी दूसरे देश की भाषा, फूल या स्थानीय संस्कृति से जुड़ा हो सकता है।
नहीं, हर समुद्री हलचल या कम तीव्रता वाले मौसम तंत्र को नाम नहीं दिया जाता। पश्चिमी उत्तरी प्रशांत और दक्षिण चीन सागर में उष्णकटिबंधीय चक्रवात को निर्धारित स्तर तक पहुंचने पर स्वीकृत सूची से नाम दिया जाता है।
यहां एक बात समझना जरूरी है कि नाम मिल जाने का अर्थ यह नहीं है कि तूफान बेहद खतरनाक हो चुका है। उसकी वास्तविक ताकत का आकलन हवा की गति, संभावित दिशा, बारिश, समुद्र की स्थिति और तटीय इलाकों पर पड़ने वाले असर के आधार पर किया जाता है। केवल नाम सुनकर तूफान के खतरे का अंदाजा लगाना सही नहीं है।
भारत में भी चक्रवातों के नाम रखे जाते हैं, लेकिन उत्तर हिंद महासागर के लिए अलग क्षेत्रीय व्यवस्था लागू है। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बनने वाले चक्रवातों के नाम भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के क्षेत्रीय विशेषीकृत मौसम विज्ञान केंद्र, नई दिल्ली के अंतर्गत तय किए जाते हैं।
इस क्षेत्र की नामकरण सूची में भारत के अलावा बांग्लादेश, ईरान, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, श्रीलंका, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात और यमन जैसे देशों के सुझाए नाम शामिल हैं।
इस तरह चांपी जैसे नामों के पीछे केवल किसी एक देश की पसंद नहीं, बल्कि कई देशों की भागीदारी से बनी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था काम करती है। नाम भले ही किसी सुगंधित फूल से जुड़ा हो, लेकिन तूफान का खतरा उसकी गति, दिशा और मौसम संबंधी परिस्थितियों से ही तय होता है।
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