रविश कुमार और अडानी
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को वरिष्ठ पत्रकार रविश कुमार और डिजिटल मीडिया पोर्टल न्यूज़लॉन्ड्री द्वारा दायर की गई दो महत्वपूर्ण याचिकाओं की सुनवाई की. इन याचिकाओं के ज़रिए केंद्र सरकार द्वारा जारी उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसमें अडानी ग्रुप से संबंधित रिपोर्ट्स और वीडियो हटाने का निर्देश दिया गया था.
क्या है पूरा मामला?
रविश कुमार और न्यूज़लॉन्ड्री ने अदालत का रुख यह कहते हुए किया था कि उन्हें सरकार की ओर से अडानी समूह से संबंधित कंटेंट हटाने के निर्देश मिले हैं, जो पत्रकारिता की स्वतंत्रता और संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का स्पष्ट उल्लंघन है. उनके अनुसार, यह आदेश सरकार की कार्यपालिका शक्तियों से परे जाकर मीडिया की आवाज़ दबाने का प्रयास था.
न्यायिक अधिकारी सचिन दत्ता की एकल पीठ ने यह कहते हुए दोनों याचिकाओं को समाप्त कर दिया कि पक्षकारों के बीच आपसी सहमति से मामला सुलझा लिया गया है. कोर्ट ने रिकॉर्ड में यह बात दर्ज की कि न्यूज़लॉन्ड्री, रविश कुमार और अडानी एंटरप्राइजेज के बीच एक आपसी समझौता हुआ है, जिसके चलते आगे की कानूनी कार्रवाई की ज़रूरत नहीं रही.
समझौते की शर्तें क्या हैं?
समझौते के तहत अडानी समूह ने स्पष्ट किया कि वह न्यूज़लॉन्ड्री और रविश कुमार से 26 सितंबर दोपहर 12 बजे तक किसी भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से सामग्री हटाने की मांग नहीं करेगा. हालांकि, जो कंटेंट पहले ही हटाया जा चुका है, वह दोबारा अपलोड नहीं किया जाएगा. यह व्यवस्था तब तक लागू रहेगी जब तक सिविल कोर्ट में लंबित याचिका का निपटारा नहीं हो जाता.
अडानी एंटरप्राइजेज की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट अनुराग अहलूवालिया ने अदालत को बताया कि न्यूज़लॉन्ड्री और रविश कुमार अब किसी अपील की योजना नहीं बना रहे हैं. इसके बजाय, वे सीनियर सिविल जज की अदालत में चल रहे सिविल सूट में सीपीसी के प्रावधानों के तहत अपनी दलीलें पेश करेंगे.
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