ग्वालियर, 6 अप्रैल 2026: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 19 वर्षीय एक विवाहित महिला को उसके 40 वर्षीय पति के पास वापस भेजने से इनकार करते हुए उसे अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ रहने की अनुमति दे दी है। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस पुष्पेंद्र यादव की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि एक बालिग महिला को अपनी जीवनशैली और पार्टनर चुनने का पूर्ण संवैधानिक अधिकार है।
यह कानूनी विवाद तब शुरू हुआ जब एक 40 वर्षीय व्यक्ति ने ग्वालियर हाईकोर्ट में हेबियस कॉर्पस (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका दायर की। पति का आरोप था कि उसकी पत्नी को किसी अन्य युवक ने अवैध रूप से बंधक बना रखा है।
हालांकि, सुनवाई के दौरान जब महिला कोर्ट में पेश हुई, तो कहानी पूरी तरह बदल गई। महिला ने जजों के सामने निडर होकर कहा कि वह न तो अपने पति के साथ रहना चाहती है और न ही अपने माता-पिता के घर जाना चाहती है।
महिला ने अदालत को अपने फैसले के पीछे के मुख्य कारण बताए:
हाईकोर्ट ने महिला की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। कोर्ट ने अगले 6 महीनों के लिए “शौर्या दीदी” व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
यह निर्णय भारतीय न्यायपालिका में Personal Liberty (व्यक्तिगत स्वतंत्रता) और Adult Autonomy को मजबूती प्रदान करता है।
ग्वालियर हाईकोर्ट के इस आदेश ने महिला को तत्काल राहत और सुरक्षा प्रदान की है। हालांकि, भविष्य में इस मामले में तलाक या कानूनी अलगाव की प्रक्रिया अलग से चलेगी, लेकिन कोर्ट ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि सामाजिक परंपराओं से ऊपर व्यक्तिगत अधिकार और पसंद (Partner Choice) का स्थान है।
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