अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने बयानों को लेकर लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। उनकी आक्रामक बयानबाज़ी और धमकियों से कई देश सहमे हुए हैं। वेनेजुएला पर कब्ज़े के बाद ट्रंप के हौसले और बुलंद नज़र आ रहे हैं और अब उनका अगला निशाना ईरान और ग्रीनलैंड हो सकता है। इसे लेकर दिए गए उनके बयान लगातार चर्चा में हैं और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।
ईरान में मौजूदा सरकार को हटाने के लिए अमेरिका अब खुलकर सामने आता दिख रहा है। वहीं दूसरी ओर ग्रीनलैंड को लेकर भी अमेरिका का रुख बदला नहीं है। ट्रंप की ग्रीनलैंड पर टेढ़ी नज़र बनी हुई है और उस पर अपना दबदबा बनाने के लिए वे किसी भी हद तक जाने को तैयार दिखाई देते हैं। हालांकि, अब ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस फ्रेडरिक नीलसन ने ट्रंप को करारा जवाब दिया है।
नीलसन ने साफ शब्दों में कहा है कि ग्रीनलैंड अमेरिका के साथ नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर ग्रीनलैंड के लोगों से अभी चुनाव के ज़रिए फैसला करने को कहा जाए, तो वे अमेरिका के बजाय डेनमार्क को चुनेंगे। उल्लेखनीय है कि ट्रंप ग्रीनलैंड को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अहम बताते रहे हैं। व्हाइट हाउस की ओर से इस द्वीप को खरीदने का सुझाव भी दिया जा चुका है और सैन्य विकल्प के इस्तेमाल से भी पूरी तरह इनकार नहीं किया गया है।
ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री Jens-Frederik Nielsen के “डेनमार्क के साथ रहने” वाले बयान पर अमेरिकी राष्ट्रपति #DonaldTrump ने कड़ा जवाब दिया है। ट्रंप ने कहा, “यह उनकी समस्या है। मैं उनसे असहमत हूँ। मैं उन्हें जानता तक नहीं। लेकिन यह उनके लिए बड़ी समस्या बनने वाली है।”
यह बयान ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और डेनमार्क के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच सामने आया है।
कोपेनहेगन में ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस फ्रेडरिक नीलसन के साथ हुई ताज़ा प्रेस कॉन्फ्रेंस में डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने भी ट्रंप की योजनाओं पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने साफ कहा कि ग्रीनलैंड पर बनाया जा रहा किसी भी तरह का दबाव अस्वीकार्य है।
ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका देश इस समय एक गंभीर भू-राजनीतिक संकट का सामना कर रहा है, लेकिन उनकी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट है। उन्होंने दो टूक कहा, “अगर हमें अभी और यहीं अमेरिका और डेनमार्क के बीच चुनना पड़े, तो हम डेनमार्क को ही चुनेंगे।”
अब देखना यह होगा कि नीलसन के इस बयान पर अमेरिका की क्या प्रतिक्रिया आती है, लेकिन अब तक के रुख को देखते हुए यह साफ है कि ट्रंप पीछे हटने के मूड में नहीं हैं और किसी भी तरह ग्रीनलैंड पर अपना नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश में लगे हुए हैं।