पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब वैश्विक ऊर्जा बाजार को गहराई से प्रभावित कर रहा है। International Energy Agency ने चेतावनी दी है कि इस संकट का असर दुनिया के हर देश पर पड़ेगा।
IEA के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर Fatih Birol ने ऑस्ट्रेलिया के कैनबरा में कहा कि मौजूदा हालात बेहद गंभीर हैं और ऊर्जा आपूर्ति पर इसका बड़ा असर दिख रहा है।
Fatih Birol ने इस संकट की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि मौजूदा हालात 1970 के दशक के तेल संकट और Russia-Ukraine War से भी ज्यादा चिंताजनक नजर आ रहे हैं। उनके अनुसार, जहां 1970 के दशक में रोजाना करीब 1 करोड़ बैरल तेल आपूर्ति प्रभावित हुई थी, वहीं इस समय यह आंकड़ा बढ़कर 1.1 करोड़ बैरल प्रतिदिन तक पहुंच चुका है।
उन्होंने आगाह किया कि यह स्थिति सिर्फ तेल बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाल सकती है और बड़े आर्थिक संकट की आशंका को जन्म दे रही है।
9 देश, 40 ठिकाने और भारी नुकसान
IEA के मुताबिक
- 9 देशों में 40 से ज्यादा तेल और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर प्रभावित
- हर दिन करीब 1.1 करोड़ बैरल तेल सप्लाई बाधित
- वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ी
यह नुकसान सिर्फ उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स पर भी इसका असर पड़ रहा है।
1970 के तेल संकट से भी ज्यादा गंभीर हालात
Fatih Birol ने इस स्थिति की तुलना 1970 के दशक के तेल संकट और Russia-Ukraine War से की।
- 1970 के दशक में करीब 1 करोड़ बैरल प्रतिदिन सप्लाई प्रभावित
- मौजूदा संकट में यह आंकड़ा 1.1 करोड़ बैरल प्रतिदिन पार
उनके मुताबिक, यह स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद खतरनाक संकेत है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा जोखिम
इस संकट का सबसे अहम केंद्र Strait of Hormuz है, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल सप्लाई होता है।
- जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित
- ईंधन सप्लाई में बाधा
- वैश्विक बाजार में कीमतों पर दबाव
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक इस रूट को सामान्य नहीं किया जाता, तब तक हालात सुधरना मुश्किल है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडरा रहा खतरा
IEA ने चेतावनी दी है कि अगर स्थिति और बिगड़ी:
- ऊर्जा संकट गहराएगा
- महंगाई बढ़ेगी
- कई देशों की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा
पश्चिम एशिया का यह संघर्ष अब केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। IEA की चेतावनी साफ संकेत देती है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो दुनिया को बड़े आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है।